MP Weather Update: निशाने बाज न्यूज़ डेस्क- मध्यप्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। अरब सागर और सौराष्ट्र क्षेत्र में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर प्रदेश के मौसम पर पड़ सकता है। इसके चलते कई इलाकों में बादल छाने और बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
मौसम में बदलाव की एक और वजह उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण है। इसके 18 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने के आसार हैं। आगे चलकर यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है, जिससे मध्य भारत के मौसम पर असर पड़ने की संभावना है।
मानसून की विदाई से पहले नया सिस्टम
मध्यप्रदेश में मानसून का आखिरी दौर चल रहा है, लेकिन मौसम प्रणालियों के कारण बारिश की गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। अरब सागर और सौराष्ट्र क्षेत्र के आसपास बने सिस्टम से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल और बारिश की स्थिति बन सकती है।वहीं, उत्तर अंडमान सागर की ओर बढ़ने वाले संभावित सिस्टम पर भी मौसम विभाग की नजर बनी हुई है। 19 सितंबर के आसपास बनने वाला निम्न दबाव क्षेत्र आगे किस दिशा में बढ़ता है, इससे मध्य भारत में मौसम की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
19 सितंबर के आसपास बन सकता है लो प्रेशर एरिया
उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण 18 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर पहुंच सकता है। इसके बाद 19 सितंबर के आसपास नए निम्न दबाव क्षेत्र के बनने की संभावना है।निम्न दबाव क्षेत्र बनने के बाद इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के आसार हैं। अगर यह सिस्टम मध्य भारत की ओर प्रभाव डालता है, तो मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, इसके असर का वास्तविक दायरा सिस्टम की आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।
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तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में खास बदलाव दर्ज नहीं किया गया। कुछ संभागों में तापमान सामान्य से कम रहा, जबकि कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक तापमान दर्ज हुआ।मौसम प्रणालियों के प्रभाव और बादलों की स्थिति के कारण अलग-अलग इलाकों में तापमान में अंतर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में बारिश और बादलों की गतिविधियों के आधार पर तापमान में बदलाव हो सकता है।
सीजन में 33.07 इंच बारिश दर्ज
मध्यप्रदेश में 1 जून से 16 सितंबर 2026 तक पूरे मानसूनी सीजन के दौरान कुल 33.07 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, प्रदेश में अब तक हुई बारिश औसत से 7 प्रतिशत कम रही है।बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 2 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश की कमी 11 प्रतिशत तक रही। इससे पता चलता है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून का असर एक जैसा नहीं रहा।
पूर्वी और पश्चिमी एमपी में बारिश का अंतर
पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य के मुकाबले 2 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह कमी 11 प्रतिशत तक पहुंची है। दोनों क्षेत्रों के आंकड़ों में अंतर होने की वजह से बारिश का वितरण अलग-अलग रहा है।आने वाले दिनों में बनने वाली मौसम प्रणालियां इस अंतर को कितना प्रभावित करेंगी, यह उनकी दिशा, ताकत और प्रदेश पर पड़ने वाले असर पर निर्भर करेगा।
आगे मौसम पर रहेगी नजर
मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई का चरण शुरू हो चुका है, लेकिन नए सिस्टम बनने की संभावना के कारण मौसम में बदलाव जारी रह सकता है। 18 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर पहुंचने वाले परिसंचरण और 19 सितंबर के आसपास संभावित निम्न दबाव क्षेत्र की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।फिलहाल प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को लेकर निगरानी जारी है। लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट और विभागीय चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।







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