भोपाल : मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़ा बहुचर्चित मामला आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है। बीते छह वर्षों से लंबित इस मामले को लेकर चयनित उम्मीदवारों में गहरी निराशा है। आरोप है कि सरकार की उदासीनता के चलते हजारों अभ्यर्थी अब तक केवल नियुक्ति पत्र का इंतज़ार कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता के वकील का सरकार पर गंभीर आरोप
ओबीसी आरक्षण मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हो रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील वरुण कपूर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा इस मामले को प्राथमिकता दी, लेकिन हर सुनवाई पर मध्य प्रदेश सरकार समय मांगती रही, जिससे मामला लगातार टलता चला गया।
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वरुण कपूर का कहना है कि पिछले छह सालों से चयनित उम्मीदवार पूरी तरह पात्र होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित हैं। केवल इस वजह से नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जा रहे क्योंकि मामला न्यायालय में लंबित है।
आरक्षण नियमों पर कोई रोक नहीं
याचिकाकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया है कि आज भी ओबीसी आरक्षण के नियमों पर कोई कानूनी रोक नहीं है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने एक ऐसी कानूनी राय के आधार पर अधिसूचना जारी की, जिसे याचिकाकर्ता पक्ष कानून के विरुद्ध बता रहा है।आज की सुनवाई में इसी अधिसूचना और सरकार के रुख पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।
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आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें
वरुण कपूर ने कहा कि आज यह देखना अहम होगा कि मध्य प्रदेश सरकार सुनवाई के लिए पूरी तैयारी के साथ आती है या नहीं। याचिकाकर्ता पक्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से मामले के शीघ्र समाधान और स्पष्ट निर्देश की मांग करेगा, ताकि वर्षों से अटकी नियुक्तियों का रास्ता साफ हो सके।
चयनित उम्मीदवारों की बढ़ती बेचैनी
छह साल से नौकरी का इंतज़ार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह मामला करियर और भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हैं।













