M.P News : सतना कांड के बाद बड़ा फैसला! एमपी में में नई ब्लड बैंक पॉलिसी लागू,ब्लड सेफ्टी के लिए नई गाइडलाइन

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। अब किसी भी मरीज को खून तभी दिया जाएगा, जब डोनर के रक्त की NAT (Nucleic Acid Test) जांच पूरी हो जाएगी। यह निर्णय सतना जिले में सामने आए HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले के बाद लिया गया है।

क्या है NAT टेस्ट और क्यों जरूरी?

NAT यानी न्यूक्लिक एसिड टेस्ट एक उन्नत जांच प्रक्रिया है, जो खून में मौजूद संक्रमणों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर सकती है। पारंपरिक जांच किट के मुकाबले यह तकनीक अधिक सटीक और संवेदनशील मानी जाती है।

पिछले वर्ष दिसंबर में सतना जिला अस्पताल में चार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने की घटना सामने आई थी। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसी के बाद सरकार ने ब्लड सेफ्टी को लेकर सख्त कदम उठाया।

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संक्रमण की जल्दी पहचान

NAT मशीन हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, HIV सहित कई गंभीर संक्रमणों की पहचान शुरुआती चरण में कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस जांच के माध्यम से लगभग 15 दिनों के भीतर संक्रमण की पुष्टि संभव है, जो सामान्य जांच में छूट सकता है।अब बिना NAT जांच के कोई भी रक्त यूनिट ब्लड बैंक में स्वीकार नहीं की जाएगी और न ही मरीज को उपलब्ध कराई जाएगी।

बड़े अस्पतालों में होगी स्थापना

भोपाल और इंदौर के सरकारी अस्पतालों में पहले से NAT मशीन उपलब्ध है। अब इसे संभागीय मुख्यालयों के प्रमुख अस्पतालों में भी स्थापित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर मशीनें निजी कंपनियों के सहयोग से लगाई जाएंगी।

सुरक्षित रक्त आपूर्ति की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि इस नई नीति से मरीजों को संक्रमणमुक्त और सुरक्षित खून उपलब्ध कराया जा सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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