Indore No Car Day: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के इंदौर में 22 सितंबर को नो कार डे मनाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से लोगों से निजी कारों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई है। इस अभियान में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा टू-व्हीलर से अपने कार्यालय पहुंचे, जबकि पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह साइकिल चलाकर ऑफिस पहुंचे।
नो कार डे के मौके पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कार के बजाय दोपहिया वाहन का इस्तेमाल किया। वह अपने गार्ड के साथ टू-व्हीलर पर सवार होकर कार्यालय पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी के इस कदम का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन अपनाने का संदेश देना था।अभियान के तहत अधिकारियों ने यह दिखाने की कोशिश की कि रोजमर्रा के जरूरी सफर के लिए हर बार कार का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।
पुलिस कमिश्नर ने साइकिल से तय किया रास्ता
इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह भी नो कार डे अभियान में शामिल हुए। वह साइकिल चलाकर अन्य अधिकारियों के साथ अपने कार्यालय पहुंचे। पुलिस अधिकारियों की भागीदारी से अभियान को प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर भी समर्थन मिला।अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी तय करने के लिए निजी कार के बजाय साइकिल, दोपहिया वाहन या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
नो कार डे का मकसद क्या है?
नो कार डे का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करना और लोगों को प्रदूषण घटाने वाले परिवहन विकल्पों के प्रति जागरूक करना है। वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरों की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।इस तरह के अभियान के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि यदि छोटी दूरी के लिए कार की जगह साइकिल, पैदल चलने या सार्वजनिक परिवहन को अपनाया जाए, तो सड़कों पर वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ एक दिन नहीं, रोजमर्रा की आदत बदलने की कोशिश
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नो कार डे को केवल एक दिन तक सीमित अभियान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य लोगों को लंबे समय तक पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे अपनी जरूरत और दूरी के अनुसार साइकिल, दोपहिया या पब्लिक ट्रांसपोर्ट को विकल्प बनाएं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ शहर की सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
22 सितंबर को मनाया जाता है कार-फ्री डे
22 सितंबर को दुनिया के कई हिस्सों में कार-फ्री डे के रूप में अभियान चलाए जाते हैं। इनका उद्देश्य निजी वाहनों का इस्तेमाल घटाकर पैदल चलने, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना है।इंदौर में भी पिछले कुछ वर्षों से 22 सितंबर को इस तरह की मुहिम के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वर्ष 2025 में इंदौर के नो कार डे को लेकर सामने आई रिपोर्टों में पेट्रोल-डीजल की खपत और प्रदूषण स्तर में कमी का दावा किया गया था। हालांकि, ऐसे अभियानों के वास्तविक प्रभाव का आकलन अलग-अलग समय अवधि और स्थानीय आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।
वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण की जरूरत
शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्वच्छ वायु कार्यक्रम में भी परिवहन क्षेत्र को प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है।नो कार डे जैसे अभियान लोगों को निजी वाहनों के विकल्पों के बारे में सोचने और अपनी यात्रा की आदतों में बदलाव करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इंदौर प्रशासन की अपील भी यही है कि लोग जरूरत के अनुसार कार का इस्तेमाल कम करें और वैकल्पिक परिवहन साधनों को अपनाएं।