MP Governor मंगुभाई पटेल का कार्यकाल पूरा, नई नियुक्ति पर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित, जल्द आ सकता है फैसला

Rahul Goshwami

MP Governor Appointment Case: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्यप्रदेश में नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब फैसले के करीब पहुंच गई है। मध्यप्रदेश राज्यपाल नियुक्ति मामला में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत जल्द तय कर सकती है कि इस याचिका पर आगे क्या आदेश दिया जाए।मंगलवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। याचिका में राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर संवैधानिक व्यवस्था का सवाल उठाया गया है।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हो गया था। इसके बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होने को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई।याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य में राज्यपाल का पद संवैधानिक रूप से जरूरी है और इस पद को लेकर उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

रिटायर्ड प्रोफेसर ने दायर की जनहित याचिका
यह जनहित याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त डॉ. एबी खान ने दायर की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 153 का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रत्येक राज्य में राज्यपाल का पद होना चाहिए।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा और अभिमन्यु सिंह ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने मंगुभाई पटेल के पांच साल के कार्यकाल के पूरा होने का मुद्दा उठाते हुए राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
Read More: MP High Court Recruitment: 40 की उम्र पार कर चुके EWS अभ्यर्थियों के लिए खुला मौका, कर सकेंगे आवेदन

याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की
मध्यप्रदेश राज्यपाल नियुक्ति मामला में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए वैकल्पिक कदम उठाए जाने चाहिए।याचिका में अदालत से राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर जल्द निर्णय लेने की मांग की गई है। इसमें राष्ट्रपति सचिवालय, केंद्रीय विधि मंत्रालय और मध्यप्रदेश के राज्यपाल सचिवालय को पक्षकार बनाया गया है।

केंद्र ने अनुच्छेद 156 का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल अदालत में मौजूद रहे। केंद्र की ओर से अदालत में संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला दिया गया।केंद्र सरकार का पक्ष था कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं। यानी केंद्र की दलील के मुताबिक केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से राज्यपाल का पद तत्काल खाली नहीं माना जाता।

कोर्ट के सामने क्या है मुख्य सवाल?
इस मामले में मुख्य सवाल राज्यपाल के कार्यकाल और नए राज्यपाल की नियुक्ति के बीच संवैधानिक स्थिति से जुड़ा है। एक ओर याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 153 और पांच साल के सामान्य कार्यकाल का हवाला दिया है, वहीं केंद्र ने अनुच्छेद 156 के आधार पर वर्तमान राज्यपाल के पद पर बने रहने की संवैधानिक स्थिति बताई है।इसलिए अब अदालत के फैसले से स्पष्ट होगा कि जनहित याचिका में उठाए गए सवालों पर हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित
मंगलवार की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया।अब अदालत के आगामी आदेश पर नजर रहेगी। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है।

अब हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार
मध्यप्रदेश राज्यपाल नियुक्ति मामला अब अदालत के आदेश के चरण में पहुंच गया है। याचिकाकर्ता की मांग और केंद्र सरकार की संवैधानिक व्याख्या दोनों अदालत के सामने रखी जा चुकी हैं।हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राज्यपाल के कार्यकाल और नई नियुक्ति से जुड़े इस विवाद पर अदालत क्या निर्देश देती है।

Share The News
Share This Article
1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *