MP News: धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम को हाईकोर्ट से जमानत, 50 हजार के मुचलके पर राहत

Rahul Goshwami

Dhirendra Shashtri Brother Bail: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को गोली चलाने के आरोप से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है।इस आदेश के बाद शालिग्राम गर्ग की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जमानत से जुड़ी सभी शर्तों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

यह मामला छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र में 14 जुलाई 2026 को हुई घटना से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मोतीलाल कुशवाहा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि कुछ लोग उन्हें बुलाकर बरगद के चबूतरे के पास ले गए थे।शिकायत के अनुसार, उन्हें बताया गया था कि छोटे सरकार ने उन्हें बुलाया है। वहां पहुंचने के बाद बातचीत के दौरान विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि इसके बाद शालिग्राम गर्ग और उनके साथ मौजूद लोगों ने उनके साथ मारपीट की।शिकायतकर्ता ने शालिग्राम गर्ग पर पिस्टल से गोली चलाने का भी आरोप लगाया था। घटना में उनके गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई थी।

जिला अदालत से खारिज हुई थी जमानत
मामले में शालिग्राम गर्ग की ओर से सबसे पहले छतरपुर की जिला अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। विशेष न्यायाधीश निधि सक्सेना की अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई की।31 अगस्त 2026 को जिला अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद बचाव पक्ष ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया और जमानत के लिए याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर दी राहत
हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद अदालत ने शालिग्राम गर्ग की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया। इसके बाद अब उनकी रिहाई की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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क्या होता है निजी मुचलका?
जमानत के मामलों में निजी मुचलका एक कानूनी प्रक्रिया है। इसमें आरोपी अदालत के सामने निर्धारित राशि की शर्त के तहत यह जिम्मेदारी लेता है कि वह जमानत की शर्तों का पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने उपस्थित होगा।इस मामले में हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर की है।

शालिग्राम पर इन धाराओं में केस
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें BNS की धारा 109(1), 296(बी), 351(3) और 3(5) शामिल हैं।इसके अलावा शालिग्राम गर्ग के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 भी लगाई गई हैं। BNS की धारा 3(5) एक से अधिक लोगों की साझा भूमिका से संबंधित है।

जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं
हाईकोर्ट से जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने शालिग्राम गर्ग को आरोपों से बरी कर दिया है। जमानत का आदेश मुकदमे की अंतिम स्थिति से अलग होता है।गोली चलाने और मारपीट से जुड़े आरोपों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले में अंतिम दोषसिद्धि या बरी किए जाने का निर्णय सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत करेगी।

अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद शालिग्राम गर्ग की रिहाई के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही मूल मामले की सुनवाई भी आगे जारी रहेगी।फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री के भाई को जमानत मिलने के बाद इस मामले में हाईकोर्ट की कार्यवाही का एक चरण पूरा हो गया है। गोली चलाने के आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।

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