Madhya Pradesh Industrial Corridor: निशोनबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना के लिए जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड बनाई जाएगी, जिसे शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये की पूंजी देने का प्रस्ताव है। सरकार की योजना पहले चरण में करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच औद्योगिक हब विकसित करने की है। परियोजना के लिए एक से डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से करीब छह लाख रोजगार के अवसर पैदा होने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, निवेश और रोजगार से जुड़े आंकड़ों का अंतिम आकलन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
10 हजार एकड़ में विकसित होंगे औद्योगिक हब
राज्य सरकार की योजना के मुताबिक, कॉरिडोर के पहले चरण में लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों को औद्योगिक टाउनशिप के रूप में तैयार करने की योजना है, ताकि कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।प्रस्तावित औद्योगिक हब में जमीन के साथ बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इससे उद्योग लगाने की प्रक्रिया आसान बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
100 करोड़ की शुरुआती पूंजी से बनेगी कंपनी
कॉरिडोर के विकास और प्रबंधन के लिए जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड गठित की जाएगी। इसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये की पूंजी का प्रस्ताव रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।यह कंपनी परियोजना से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और औद्योगिक हब तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी। हालांकि, कंपनी के गठन, कामकाज और परियोजना के अलग-अलग चरणों का विस्तृत ब्योरा संबंधित सरकारी आदेशों और परियोजना रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।
छह लाख रोजगार पैदा करने की योजना
सरकार की ओर से परियोजना में एक से डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य बताया गया है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब छह लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।यदि परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो निर्माण, परिवहन, भंडारण, विनिर्माण और सहायक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बन सकते हैं। औद्योगिक इकाइयों के आने से स्थानीय कारोबार और छोटे उद्योगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।हालांकि, निवेश और रोजगार के ये आंकड़े फिलहाल लक्ष्य के तौर पर देखे जाने चाहिए। वास्तविक निवेश, उद्योगों की संख्या, निर्माण की समयसीमा और रोजगार के अवसरों का पता विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा निवेशकों के साथ होने वाले समझौतों के बाद ही चलेगा।
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कलेक्टरों को अधिकार देने का प्रस्ताव
कैबिनेट बैठक में सांदीपनि विद्यालयों में विद्यार्थियों के परिवहन के लिए चलने वाली बसों से जुड़े प्रशासनिक अधिकारों पर भी निर्णय लिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन बसों के संचालन से संबंधित अधिकार कलेक्टरों को देने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर परिवहन व्यवस्था के संचालन और निगरानी को सुगम बनाना बताया गया है।इस व्यवस्था के व्यावहारिक स्वरूप और कलेक्टरों को मिलने वाले अधिकारों की सीमा संबंधित आदेश से स्पष्ट होगी।
प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर
बैठक में नए जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई। इससे संबंधित विभागीय सेवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। कार्यालयों के खुलने से योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों से जुड़े कामकाज को आसान बनाने का लक्ष्य है।इसके अलावा खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस राशि का विभागवार ब्योरा और खर्च की शर्तें आधिकारिक निर्णयों से स्पष्ट होंगी।
पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी ली जा रही बिजली
बैठक के दौरान प्रदेश में बिजली की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हवाले से बताया गया कि मध्य प्रदेश बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी बिजली ले रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिन में बिजली संकट दूर हो जाएगा।बिजली की उपलब्धता, आपूर्ति में सुधार और संकट पूरी तरह दूर होने की स्थिति का आकलन आगे की आधिकारिक जानकारी से किया जा सकेगा।
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मंजूरी मिलने से राज्य में औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना को गति मिल सकती है। प्रस्तावित औद्योगिक हब, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य इस परियोजना के प्रमुख हिस्से हैं। अब इसकी सफलता परियोजना रिपोर्ट, जमीन की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं, निवेशकों की भागीदारी और तय समयसीमा पर निर्भर करेगी।
