Monsoon Session : पटना: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार, 21 जुलाई से शुरू हो गया है, जो आगामी 25 जुलाई तक चलेगा। यह सत्र वर्तमान सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र है, क्योंकि इसी वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सत्र के पहले ही दिन विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जोरदार हंगामा किया। सदन के अंदर और बाहर विपक्षी विधायकों द्वारा नारेबाजी की गई और सरकार की नीतियों व निर्णयों पर सवाल उठाए गए।
AIMIM, RJD, कांग्रेस और वामदलों का साझा प्रदर्शन
सत्र की शुरुआत होते ही AIMIM के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करते दिखाई दिए। वहीं, वामपंथी दलों के विधायक काले कपड़ों में पहुंचे और मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर पोस्टर-बैनर लेकर विधानसभा परिसर में पहुंचे। वामदलों ने इसे “अघोषित आपातकाल” करार दिया। राजद और कांग्रेस विधायकों ने भी इस मुद्दे पर विरोध जताते हुए पोस्टर और बैनर लहराए।
विधानसभा के मुख्य द्वार पर राजद, कांग्रेस और वामदलों के विधायकों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी विधायकों का आरोप था कि सरकार चुनाव पूर्व मनमाने फैसले लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। AIMIM के विधायकों ने प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी और विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को सदन के भीतर उठाया।

काले कपड़ों में वामदल विधायक, पोस्टर-बैनर लेकर पहुंचे
माले (CPI-ML) के विधायकों ने काले कपड़े पहनकर विरोध जताया। विधायक समूह ने इसे लोकतंत्र की हत्या का प्रतीक बताया। उन्होंने सदन के भीतर और बाहर ‘अघोषित आपातकाल’ के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। माले विधायकों का कहना था कि मतदाता सूची में धांधली कर सरकार सत्ता में लौटने की तैयारी कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्पीकर ने की शांति की अपील
बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने सदन की कार्यवाही शुरू की, लेकिन विपक्षी विधायकों की ओर से लगातार हंगामा होता रहा। स्पीकर ने कई बार विपक्ष से शांत रहने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की, लेकिन विपक्षी दलों ने अपनी आवाज बुलंद रखने का संकल्प दोहराया।
विधानसभा के भीतर और बाहर गूंजे नारे
पूरा दिन विधानसभा परिसर विरोध, नारेबाजी और राजनीतिक बयानबाजी से गूंजता रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार आगामी चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है और जनविरोधी फैसलों को लागू करने में लगी है। बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र चुनाव पूर्व का सबसे महत्वपूर्ण सत्र माना जा रहा है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है, वहीं सत्तापक्ष अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने लाने की रणनीति में जुटा है। पहले दिन के घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि आगामी दिनों में सदन में राजनीतिक गर्मी और बढ़ेगी।













