Medical Equipment Scam : रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल ऑफिस ने मेडिकल उपकरण और री-एजेंट खरीद घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने शशांक चोपड़ा को 19 जनवरी 2026 तक के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
ईडी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया है कि शशांक चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। आरोपी ने मांग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाते हुए अत्यधिक कीमतों पर मेडिकल इक्विपमेंट की सप्लाई की।
जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के एक जटिल नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। आरोप है कि अपराध से हुई कमाई (Proceeds of Crime) को छिपाने के लिए शशांक चोपड़ा ने कई फर्जी कंपनियां और संस्थाएं बनाईं। मेंटेनेंस और ट्रेनिंग के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट तैयार किए गए और अंततः बड़ी रकम कैश में निकालकर अवैध संपत्ति बनाने में इस्तेमाल की गई। ईडी ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए अब तक बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और वाहनों समेत 43 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या फ्रीज कर दी है।
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, सर्च ऑपरेशन के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग की लेयरिंग और छुपाने की प्रक्रिया की पुष्टि करते हैं। इस कार्रवाई ने प्रदेश के व्यापारिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ यह सख्ती जारी रहेगी और इस घोटाले में शामिल अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों और अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।











