Mauganj Land Controversy : मऊगंज। मऊगंज जिले में भाजपा विधायक से जुड़ा एक जमीन विवाद अब बड़े सियासी और जातिगत संग्राम में तब्दील हो गया है। 3 जनवरी को बाईपास क्षेत्र में शुरू हुए इस विवाद ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र की राजनीति में भूचाल आ गया है और भाजपा विधायक प्रदीप पटेल पर सीधे तौर पर जातिवाद के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
विवाद की जड़ में मऊगंज बाईपास स्थित एक जमीन है, जिसे लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। मामला तब गरमाया जब भाजपा विधायक एक पक्ष के समर्थन में विवादित स्थल पर धरने पर बैठ गए। इसके विरोध में दूसरा पक्ष इतना उग्र हुआ कि कुछ लोगों ने आत्मदाह तक की कोशिश की। माहौल बिगड़ता देख विधायक को वहां से हटना पड़ा, जिसके बाद उनके निज सचिव की शिकायत पर पुलिस ने लगभग 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
शनिवार को पुलिस ने ढढनी हेडवार और घुरेहटा इलाकों में अचानक दबिश देकर अनिल पांडेय उर्फ लल्लू सहित आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में रोहित तिवारी, हरिओम शुक्ला, आशीष द्विवेदी, अर्पित पांडेय, अजीत पांडेय, संदीप पांडेय और गौरव तिवारी शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों के बाद अनिल पांडेय ने शासन-प्रशासन पर विधायक के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए एक बेहद तल्ख बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज मऊगंज जिले में ब्राह्मण होना एक अभिशाप बन गया है।
अनिल पांडेय ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में केवल एक जाति विशेष की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है और प्रशासन ने विधायक के सामने घुटने टेक दिए हैं। उनका दावा है कि जिस जमीन पर कब्जा करने की नीयत से यह पूरा प्रपंच रचा गया, वह जमीन असल में ब्राह्मणों की है। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब वे अपने घर में भोजन कर रहे थे, तब पुलिस उन्हें बिना किसी स्पष्ट जानकारी के घसीटकर ले गई।
यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मऊगंज की सियासत में जातिगत ध्रुवीकरण का कारण बनता जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों ने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। आरोपियों का कहना है कि वे झूठे मुकदमों से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियां दर्ज एफआईआर और साक्ष्यों के आधार पर की गई हैं और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है क्योंकि विपक्षी दलों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया है। मऊगंज में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता को लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, जिले में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।













