Wednesday, August 19, 2026
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Make In India Obstacles : बजट 2026-27 : मैन्युफैक्चरिंग की राह में ‘रेड टेप’ और ‘ऊर्जा लागत’ सबसे बड़ी रुकावट, एसोचैम सर्वे में खुलासा

Make In India Obstacles : नई दिल्ली। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) के हालिया सर्वे के मुताबिक, देश के 55% कारोबारी अगले एक साल के माहौल को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार धीमी करने वाले कारकों ने चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में शामिल उद्योगपतियों ने सरकार से आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में विनिर्माण और MSME क्षेत्र के लिए विशेष रियायतों की मांग की है।

विस्तार में बाधक 5 प्रमुख चुनौतियां:

  1. उच्च अनुपालन बोझ: जटिल नियामकीय प्रक्रियाएं और कागजी कार्रवाई सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

  2. लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा लागत: परिवहन और बिजली की ऊंची दरों के कारण वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो रहे हैं।

  3. सस्ती पूंजी की कमी: छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए दीर्घकालिक और सस्ती ऋण सुविधा का अभाव है।

  4. कुशल श्रम की उपलब्धता: तकनीक के बदलते दौर में प्रशिक्षित कामगारों की कमी एक बड़ी समस्या है।

  5. तकनीकी पिछड़ापन: ऑटोमेशन और एआई (AI) अपनाने के लिए पर्याप्त कर प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहे हैं।

MSME के लिए ‘देरी से भुगतान’ सबसे बड़ा दर्द: सर्वे ने साफ किया कि जब तक MSME क्षेत्र मजबूत नहीं होगा, विनिर्माण का विस्तार संभव नहीं है। 35% से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि सरकारी योजनाओं (जैसे PLI) का जमीनी लाभ अब तक कम मिला है। MSMEs के लिए देरी से भुगतान (Delayed Payments) और वर्किंग कैपिटल की कमी को सबसे गंभीर संकट बताया गया है।

उद्योग जगत की प्रमुख मांगें:

  • टैक्स सरलीकरण: टीडीएस/टीसीएस के जटिल प्रावधानों को आसान बनाया जाए ताकि नकदी प्रवाह (Cash Flow) सुधरे।

  • कस्टम ड्यूटी में सुधार: कच्चे माल पर आयात शुल्क का युक्तिकरण किया जाए।

  • टेक्नोलॉजी इंसेंटिव: इंडस्ट्री 4.0 और एआई अपनाने के लिए विशेष कर छूट दी जाए।

  • ग्रीन चैनल क्रेडिट: जीएसटी डेटा के आधार पर बिना किसी रुकावट के ऋण सुविधा प्रदान की जाए।

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