MP News: मध्य प्रदेश के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे सैकड़ों वोटर ID कार्ड मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ये कार्ड इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं। नदी किनारे सफाई के दौरान बड़ी संख्या में कार्ड मिलने की बात कही जा रही है। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
सफाई के दौरान मिले कार्ड
जानकारी के मुताबिक, सुबह नर्मदा नदी के किनारे सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान सफाई कर्मियों को बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड पड़े मिले। इन कार्डों को राऊ विधानसभा क्षेत्र का बताया जा रहा है। हालांकि, कार्डों की वास्तविकता, उनकी संख्या और वे नदी किनारे कैसे पहुंचे, इस बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सज्जन सिंह वर्मा ने उठाए सवाल
पूर्व कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान इस मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि मंडलेश्वर में नर्मदा किनारे राऊ विधानसभा क्षेत्र के वोटर ID कार्ड मिलने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।वर्मा ने चुनाव आयोग के साथ प्रदेश और जिला प्रशासन से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि मिले हुए कार्ड असली हैं या नकली और वे नदी किनारे किस तरह पहुंचे।
कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस ने इस मामले की जांच कराने की बात कही है। पार्टी की मांग है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाए और तथ्यों को सामने लाया जाए। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।उन्होंने अन्य मामलों में जांच के परिणाम सामने नहीं आने को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि किसी भी गंभीर प्रकरण में केवल जांच का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका नतीजा भी सामने आना चाहिए।
प्रशासन के आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल, वोटर ID कार्ड मिलने के मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कार्डों की प्रामाणिकता, उनकी संख्या और उनके वहां पहुंचने के कारणों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए अभी इस घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।अब इस मामले में चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की जांच अहम होगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कार्ड किसके हैं, वे वहां कैसे पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जरूरत है।