भोपाल। Nishaanebaz.com-Bhopal Police VIP Treatment Controversy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से पुलिस महकमे और उसकी सुरक्षा व्यवस्था की बखिया उधेड़ने वाला एक बेहद अजीबोगरीब और शर्मनाक मामला सामने आया है। जब बात अपराधियों को शह देने और उनकी खातिरदारी की हो, तो भोपाल पुलिस की दरियादिली का कोई मुकाबला नहीं! दरअसल, पूरा मामला भोपाल जिला अदालत (Bhopal District Court) परिसर के बाहर का है, जहाँ न्यायिक अभिरक्षा में लाए गए एक आरोपी को हथकड़ी लगे होने के बावजूद ऐसा शाही ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ मिलता दिखा, जिसे देखकर आम नागरिक भी भौंचक्के रह गए।
हथकड़ी फैशन, हाथ में मोबाइल और सिगरेट का धुआं
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने भोपाल पुलिस के तमाम सुरक्षा दावों, सुरक्षा मैनुअल और कस्टडी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक गंभीर आरोपी बेहद इत्मीनान से अपने हाथ में हथकड़ी लगाए खुलेआम सिगरेट के लंबे-लंबे कश उड़ा रहा है और साथ ही अपने मोबाइल फोन पर किसी से लंबी-चौड़ी गप्पे लड़ा रहा है। वीडियो देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वह किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार हुआ मुजरिम है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई वीआईपी नेता या अधिकारी अपने अमले के साथ दौरे पर निकला हो।
खाकी के पहरे में खुली छूट, कमला नगर पुलिस पर उठे सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी के साथ तैनात सुरक्षाकर्मी भी इतनी निष्ठा से खड़े दिखे मानो वे आरोपी की रखवाली नहीं, बल्कि उसकी प्राइवेसी (निजता) का ध्यान रख रहे हों ताकि कोई उसमें खलल न डाल सके। सूत्र बता रहे हैं कि सुरक्षा में तैनात ये लापरवाह पुलिसकर्मी भोपाल के कमला नगर थाना (Kamla Nagar Police Station) से जुड़े हुए हैं।
न्यायिक कस्टडी और पुलिस अभिरक्षा के दौरान किसी आरोपी को सरेआम मोबाइल फोन मुहैया कराना, बाहरी दुनिया से संपर्क साधने देना और खुलेआम धूम्रपान की अनुमति देना भोपाल पुलिस कमिश्नरेट (Bhopal Police Commissionerate) की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
वीडियो के सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल होने के बाद अब पुलिस महकमे के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। हमेशा की तरह अब मामले में जांच का औपचारिक आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, देखना होगा कि नियम तोड़ने वाले इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ विभागीय जांच के नाम पर फाइलों में दबा दिया जाएगा।