MP News: जबलपुर। मध्य प्रदेश में आयुष छात्रों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर जबलपुर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जबलपुर महानगर के नेतृत्व में शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, गौरीघाट के आयुष छात्र-छात्राओं ने अपनी मांग को लेकर कॉलेज परिसर से झंडा चौक तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया।
प्रदर्शन में 150 से अधिक छात्र-छात्राओं के शामिल होने की बात कही गई है। छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी की और सरकार से आयुष विद्यार्थियों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की।
एमबीबीएस की तर्ज पर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस छात्रों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। ऐसे में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) से जुड़े छात्रों के स्टाइपेंड में भी समान रूप से वृद्धि की जानी चाहिए।
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छात्रों का कहना है कि आयुष पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को भी अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण के दौरान कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद स्टाइपेंड में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से विद्यार्थियों में नाराजगी है।
झंडा चौक पर बनाई मानव श्रृंखला
कॉलेज से निकाला गया पैदल मार्च झंडा चौक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया। छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान ABVP नेता आर्यन पुंज ने कहा कि आयुष छात्रों की स्टाइपेंड वृद्धि की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार को एमबीबीएस छात्रों की तरह आयुष छात्रों के स्टाइपेंड पर भी ध्यान देना चाहिए।
मांग नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ABVP नेता आर्यन पुंज ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में छात्र उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के घेराव की चेतावनी भी दी।फिलहाल आयुष छात्रों के प्रदर्शन के बाद स्टाइपेंड वृद्धि की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से इस संबंध में लिए जाने वाले निर्णय पर है।






