Bhopal News: भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में निर्माण की वैधता को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में नगर निगम ने 22 मकानों को लेकर कार्रवाई शुरू की है। निगम की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक इन निर्माणों को स्वीकृत टीएंडसीपी नक्शे के अनुरूप नहीं पाया गया है। इनमें 17 मकानों के मालिकों को 15 दिन के भीतर संबंधित अवैध निर्माण अपने स्तर पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि पांच अधूरे मकानों में तत्काल निर्माण कार्य रोकने को कहा गया है।
यह मामला गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित से जुड़ा है। निगम की कार्रवाई के बाद कॉलोनी में रहने वाले लोगों और प्लॉट से जुड़े पक्षों के बीच पुराने विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। खास बात यह है कि इन निर्माणों को लेकर नगर निगम की अपनी बिल्डिंग परमिशन शाखा द्वारा जारी की गई मंजूरियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
17 मकान मालिकों को मिली 15 दिन की मोहलत
नगर निगम की जांच के आधार पर शुभालय विहार के 22 निर्माणों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। इनमें 17 मकान ऐसे हैं, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है। इन मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन का समय दिया गया है। निगम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अवधि में संबंधित निर्माण को मकान मालिक अपने स्तर पर हटाएं।
वहीं पांच मकानों का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इन मामलों में निगम ने आगे का काम तत्काल रोकने के निर्देश जारी किए हैं। यानी इन मकानों में किसी भी तरह का नया निर्माण करने पर रोक रहेगी।
हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद बढ़ी कार्रवाई
बताया गया है कि मामले में हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद नगर निगम की कार्रवाई तेज हुई। सहकारिता विभाग के उपायुक्त ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को पत्र भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बाद निगम स्तर पर निर्माणों की जांच और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।पहले 17 मकानों को नोटिस दिएथे। इसके बाद पांच अन्य अधूरे निर्माणों को भी नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद कार्रवाई के दायरे में आने वाले निर्माणों की संख्या 22 हो गई।
44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर प्लॉट बेचने का दावा
मामले को लेकर याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित ने जमीन और प्लॉट की बिक्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके दावे के अनुसार गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब पांच एकड़ जमीन पर 48 प्लॉट बेचे गए। उनका आरोप है कि इनमें से कई प्लॉट ऐसे लोगों को बेचे गए, जो संस्था के सदस्य नहीं थे।
याचिकाकर्ता का यह भी दावा है कि प्लॉट खरीदारों से संबंधित रकम संस्था को दी गई, लेकिन वास्तविक संस्थापक सदस्यों के हित प्रभावित हुए और उन्हें जमीन का अपेक्षित हिस्सा नहीं मिल सका। हालांकि इन दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।
38 रजिस्ट्रियों की रकम को लेकर भी जांच
सहकारिता विभाग की फरवरी 2026 की जांच में जमीन और रजिस्ट्रियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर भी सवाल सामने आने की बात कही गई है। जांच के मुताबिक वर्ष 2018 से 2023 के बीच बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से 32 रजिस्ट्रियों को जांच में अवैध बताया गया।
इसके अलावा 38 रजिस्ट्रियों से संबंधित करीब 18.74 करोड़ रुपये की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं होने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है। ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में कथित हेरफेर का भी उल्लेख किया गया है। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन पदाधिकारियों के कार्यकाल से संबंधित बताई गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल बिल्डिंग परमिशन को लेकर
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। जिन निर्माणों को अब निगम की ओर से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बताया जा रहा है, उनमें से कुछ के लिए निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा से अनुमति जारी होने की बात सामने आई है।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि निर्माण को अनुमति किस आधार पर दी गई और बाद में उसे स्वीकृत नक्शे के विपरीत कैसे पाया गया। फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई निर्माण की वैधता और स्वीकृत नक्शे के पालन से संबंधित है, जबकि जमीन, प्लॉट और रजिस्ट्रियों का विवाद सहकारिता विभाग तथा न्यायालय की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।फिलहाल 17 मकान मालिकों को 15 दिन में निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया है और पांच अधूरे मकानों में काम रोक दिया गया है। जमीन और रजिस्ट्रियों से जुड़े आरोपों पर आगे की स्थिति जांच और अदालत के फैसलों से स्पष्ट होगी।






