Bhind Asha Usha Workers Protest: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के भिंड जिले में आशा और उषा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में कथित अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल और सेवा समाप्त करने की धमकी से नाराज जिलेभर की महिला कार्यकर्ता कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचीं। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद भी मुलाकात नहीं होने पर महिलाएं कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गईं।कार्यकर्ताओं ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाली महिला कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
7 सितंबर की बैठक से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला 7 सितंबर को आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक से जुड़ा बताया जा रहा है। महिला कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बैठक के दौरान राज्य टीकाकरण कार्यक्रम अधिकारी एलपी भगोरिया ने उनके लिए कथित तौर पर ‘मक्कार’ और ‘कामचोर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।कार्यकर्ताओं के अनुसार, अधिकारी ने उन पर घर बैठे पैसे लेने का आरोप लगाया और सेवाएं समाप्त करने की धमकी भी दी। इन आरोपों के बाद आशा और पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई।हालांकि, बैठक में वास्तव में क्या हुआ और लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कलेक्टर से मिलने पहुंचीं, तीन घंटे करना पड़ा इंतजार
कथित अभद्र व्यवहार की शिकायत लेकर जिलेभर की महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। उनका उद्देश्य कलेक्टर के सामने अपनी बात रखना और मामले में कार्रवाई की मांग करना था।लेकिन करीब तीन घंटे तक इंतजार के बाद भी जब कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी, तो कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने प्रशासन से उनकी शिकायत पर तत्काल ध्यान देने की मांग की।
कोरोना काल की सेवाओं का दिया हवाला
धरने पर बैठी महिला कार्यकर्ताओं ने कोरोना महामारी के दौरान निभाई गई अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि महामारी के समय उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता किए बिना घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दिया था।कार्यकर्ताओं का सवाल है कि विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाली महिलाओं के सम्मान पर इस तरह सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी के काम की समीक्षा की जा सकती है, लेकिन कथित अपमानजनक भाषा और धमकी का इस्तेमाल उचित नहीं होना चाहिए।
निष्पक्ष जांच और अधिकारी पर कार्रवाई की मांग
महिला कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समीक्षा बैठक में अधिकारी की ओर से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कौरव समेत संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने कार्यकर्ताओं की शिकायत को गंभीरता से लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी सेवाओं पर सवाल उठाने से पहले वर्षों के काम और कोरोना काल में निभाई गई जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
भिंड में आशा और उषा कार्यकर्ताओं के धरने के बाद अब प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। मुख्य सवाल यह है कि क्या महिला कार्यकर्ताओं को कलेक्टर से मुलाकात का मौका मिलेगा और क्या कथित अभद्र व्यवहार की जांच कराई जाएगी।फिलहाल कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।







[…] […]