Nishaanebaz News Desk-Gwalior High Court Potholed Road: ग्वालियर की खराब सड़कों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। अब सिर्फ कागजों में सड़क निर्माण और मरम्मत का हिसाब देना पर्याप्त नहीं होगा। ग्वालियर खराब सड़क मामला में कोर्ट ने साल 2021 से 2026 तक सड़कों पर खर्च हुए सरकारी पैसे का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सड़क की वास्तविक गुणवत्ता जांचने के लिए खुदाई कर सैंपल लेने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।
ग्वालियर खराब सड़क मामला में हाईकोर्ट ने नगर निगम और संबंधित विभागों से पिछले पांच साल के दौरान सड़कों पर किए गए खर्च की जानकारी मांगी है। कोर्ट यह देखना चाहता है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए कितना पैसा जारी हुआ, कितना खर्च किया गया और उसके बाद भी सड़कों की स्थिति इतनी खराब क्यों है।इसके साथ ही सड़क निर्माण के समय तैयार की गई ओरिजनल मेजरमेंट बुक (MB) भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
करोड़ों खर्च के बाद सड़कें क्यों बदहाल?
ग्वालियर खराब सड़क मामला में सीनियर एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान यह सवाल सामने आया कि यदि हर साल सड़क निर्माण और मरम्मत पर बड़ी रकम खर्च की जा रही है, तो सड़कें कुछ ही समय में खराब क्यों हो जाती हैं।हाईकोर्ट अब इसी सवाल का जवाब रिकॉर्ड के साथ-साथ जमीन पर जांच के जरिए तलाशेगा।
अब सड़क की खुदाई से होगी असली जांच
ग्वालियर खराब सड़क मामला में सबसे अहम कदम सड़क की खुदाई कर सैंपल लेने का है। इसके जरिए यह जांच की जाएगी कि सड़क की वास्तविक मोटाई तय मानकों के अनुसार है या नहीं।सैंपल में इस्तेमाल हुए डामर, गिट्टी और कंक्रीट की गुणवत्ता और मात्रा की भी जांच की जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि सड़क निर्माण तय मानकों के अनुसार हुआ था या सिर्फ ऊपर से काम पूरा किया गया।
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चार सदस्यीय स्वतंत्र कमेटी करेगी मदद
ग्वालियर खराब सड़क मामला की जांच को निष्पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट ने चार सदस्यों की स्वतंत्र कमेटी बनाई है। इसमें एडवोकेट्स के साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं।कमेटी सड़क निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड और मौके पर होने वाली जांच में सहयोग करेगी। इसका उद्देश्य जांच को तकनीकी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना है।
सैंपलिंग के समय नगर निगम अधिकारी नहीं रहेंगे
ग्वालियर खराब सड़क मामला में हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। सड़क की खुदाई और सैंपल लेने के दौरान नगर निगम का कोई अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा।इसका मकसद जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाना और सड़क की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन करना है।
NHAI और PWD भी होंगे मामले का हिस्सा
ग्वालियर खराब सड़क मामला अब केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगा। शहर की सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़े NHAI और PWD को भी मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।इससे सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े अलग-अलग विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
नगर निगम की रिपोर्ट में सामने आई सड़कों की बदहाली
ग्वालियर खराब सड़क मामला में सोमवार को नगर निगम की ओर से शहर की सड़कों की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई थी। रिपोर्ट में शहर की कई सड़कों की खराब स्थिति सामने आई।इसके बाद कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब हर साल सड़क निर्माण और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो बारिश या कुछ महीनों के बाद सड़कें उखड़ने की स्थिति क्यों बन रही है।
अब तय होगी किसकी जवाबदेही
ग्वालियर खराब सड़क मामला में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि जांच में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अब रिकॉर्ड की जांच के साथ सड़क की खुदाई कर सैंपल की जांच होगी।इस प्रक्रिया से सड़क निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता सामने आने की उम्मीद है। यदि जांच में तय मानकों में गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय हो सकती है।मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त, गुरुवार को होगी। अब सभी की नजर इस सुनवाई और सड़क जांच से सामने आने वाली रिपोर्ट पर रहेगी।

