[ nishaanebaz.com] Bhind Illegal Liquor:प्रदीप शर्मा\ भिण्ड। जिले में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। देहात थाना पुलिस ने कृष्णा नगर बम्बा के पास एक मकान में दबिश देकर बड़ी मात्रा में अवैध देशी शराब बरामद की है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 43 पेटी अवैध शराब, करीब 387 लीटर, जब्त की है, जिसकी कीमत लगभग 2 लाख 15 हजार रुपये बताई जा रही है। मामले में पुलिस ने कैलाश नारायण नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जहां अवैध शराब कारोबारियों पर शिकंजा कसने की बात सामने आई है, वहीं आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब एक मकान में कैसे जमा की गई और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
कृष्णा नगर बम्बा के पास मकान में दबिश
जानकारी के अनुसार, देहात थाना पुलिस को क्षेत्र में अवैध शराब के भंडारण और बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने कृष्णा नगर बम्बा के पास स्थित एक मकान में दबिश दी।तलाशी के दौरान वहां से 43 पेटी अवैध देशी शराब बरामद की गई। पुलिस के मुताबिक बरामद शराब की मात्रा करीब 387 लीटर है। शराब की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख 15 हजार रुपये आंकी गई है।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से कैलाश नारायण नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम सहित संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग पर सवाल
इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले में अवैध शराब के कारोबार और उस पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई कर अवैध शराब की खेप पकड़ रही है, लेकिन अवैध शराब की बिक्री, भंडारण और तस्करी पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब एक मकान तक पहुंची कैसे और वहां उसका भंडारण कब से किया जा रहा था। क्या संबंधित विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं थी, या फिर क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही थी।
43 पेटी शराब पहुंचने की जानकारी क्यों नहीं मिली?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस को सूचना के आधार पर कार्रवाई कर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद हो सकती है, तो आबकारी विभाग की नियमित निगरानी के दौरान इस तरह के कारोबार का पता क्यों नहीं चल पाया।अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी सप्लाई चेन की भी जांच जरूरी है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि बरामद शराब कहां से लाई गई, इसे किन क्षेत्रों में खपाने की तैयारी थी और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
शराब माफियाओं पर कार्रवाई जारी
भिण्ड पुलिस लगातार अवैध शराब कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इस कार्रवाई के बाद भी पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि आरोपी के पास इतनी बड़ी मात्रा में शराब कैसे पहुंची और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि शराब केवल एक स्थान पर भंडारित की जा रही थी या फिर इसे अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करने की योजना थी।
निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
पुलिस की कार्रवाई ने अवैध शराब कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता जरूर दर्ज की है, लेकिन साथ ही संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह रोकने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर समन्वय और नियमित जांच की आवश्यकता है।फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि अवैध शराब का यह कारोबार कितने समय से चल रहा था और इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका है या नहीं। वहीं, 43 पेटी शराब की बरामदगी के बाद आबकारी विभाग की सक्रियता और निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल भी जवाब मांग रहे हैं।





