Monday, February 16, 2026
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Dead on paper : जीवित मामा को कागजों में मृत दिखाकर भांजे ने हड़पी जमीन, न्याय के लिए लगा रहा सरकारी दफ्तरों के चक्कर

Dead on paper : रीवा। रीवा जिले के त्योंथर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मझिगवां में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक भांजे ने गाँव के सरपंच के साथ मिलकर दो जीवित मामा को कागजों में मृत घोषित कर उनकी पैतृक जमीन अपने नाम करा ली और बाद में उसे बेच भी दिया। अब, कागजों में ‘मृत’ घोषित हो चुके पीड़ित मामा अपनी जमीन वापस पाने के लिए हाथ में एक दस्ती लेकर दर-दर भटक रहे हैं जिस पर लिखा है, “साहब मैं जिंदा हूँ, मेरी जमीन दिला दो”।

Dead on paper : मामला मझिगवां गाँव के निवासी महेंद्र पाल और अमरनाथ पाल से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, पिता की मृत्यु के बाद दोनों भाई लगभग 14 वर्ष पूर्व रोजगार की तलाश में राजस्थान चले गए थे और काफी समय तक घर नहीं लौटे। इसी बात का फायदा उठाकर उनके भांजे अर्जुन प्रसाद ने पहले गाँव में उनके मृत होने की झूठी खबर फैलाई, यहाँ तक कि उनकी तेरहवीं का भोज भी कराया। इसके बाद, उसने ग्राम पंचायत मझिगवां की सरपंच कलावती के साथ मिलकर एक फर्जी खानदानी संचरा (वंशावली) बनवाया, जिसमें दोनों मामा को आधिकारिक तौर पर मृत दर्शाया गया।

Dead on paper : इस फर्जी संचरा के आधार पर, भांजे अर्जुन प्रसाद ने त्योंथर तहसील कार्यालय से दोनों मामा की जमीन अपने नाम करा ली। जब दोनों पीड़ित मामा, महेंद्र पाल और अमरनाथ पाल, कुछ समय बाद गाँव लौटे, तो वे हैरान रह गए। न केवल गाँव में हर कोई उन्हें मरा हुआ मान रहा था, बल्कि उनकी पैतृक जमीन भी भांजे ने अपने नाम कराकर दूसरे के हाथ बेच दी थी।

Dead on paper : पीड़ित महेंद्र पाल ने बताया कि वे न्याय के लिए तहसील और सोहागी थाना के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। उन्होंने हताश होकर चेतावनी दी है कि अगर सात दिन के भीतर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे तहसील कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेंगे। कागज में ‘मृत’ हो चुके ये जीवित व्यक्ति अब एक ‘भूत’ की तरह एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।

Dead on paper : इस संबंध में, त्योंथर एसडीएम पीएस त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें इस मामले में आवेदन मिला है और उन्होंने ज़मीन के हस्तांतरण पर स्टे (रोक) लगा दिया है। एसडीएम ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फ़िलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन ‘जीवित भूतों’ को कब तक न्याय मिल पाएगा और फर्जीवाड़ा करने वाले सरपंच व भांजे पर क्या कार्रवाई होती है।

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