Lailunga News : लैलूंगा जर्जर स्कूल बना मौत का कुआं, बच्चे दूसरे के आंगन में पढ़ने को मजबूर

VIKASH KHALKHO

Lailunga News : गौरीशंकर/घरघोड़ा : छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक भयावह तस्वीर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम पंचायत खम्हार बस्तीपारा से सामने आई है, जहाँ एक प्राथमिक शाला आज “शिक्षा का मंदिर” नहीं, बल्कि मौत का कुंआ बन चुकी है। दीवारों में गहरी दरारें, छत से झड़ता पलस्तर और टपकता पानी — यह सब किसी बड़ी दुर्घटना का संकेत दे रहे हैं। यह वही जगह है जहाँ मासूम बच्चों के भविष्य का निर्माण होना चाहिए था, लेकिन अब यही भवन उनके जीवन के लिए खतरा बन गया है। हालात इतने खतरनाक हैं कि बच्चे अपने ही स्कूल भवन में नहीं, बल्कि दूसरे के परछी में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।लैलूंगा में बच्चों की ज़िंदगी से खिलवाड़ : जर्जर स्कूल भवन बना ‘मौत का कुआं’, मासूम दूसरे के परछी में पढ़ने को मजबूर।

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छत झड़ती है, दीवार हिलती है… फिर भी बच्चे वहीं बैठते हैं!” : स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में स्कूल की छत से पानी टपकता है। किताबें भीग जाती हैं, और बच्चों को जान जोखिम में डालकर क्लास में बैठना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार भवन की मरम्मत की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। शिक्षकों ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीईओ लैलूंगा को कई बार लिखित रूप में अवगत कराया, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न कोई निरीक्षण हुआ, न मरम्मत।

Lailunga News : शिक्षा का मंदिर या प्रशासन की लापरवाही का प्रतीक?” – एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया हम बच्चों को भवन के बाहर बैठाकर पढ़ाते हैं, क्योंकि किसी भी वक्त छत गिर सकती है। जिम्मेदार अधिकारी फाइलें पलटने में व्यस्त हैं, लेकिन बच्चों की जान पर मंडराता खतरा कोई नहीं देख रहा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द नई स्कूल बिल्डिंग का निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चे डर के साए में पढ़ रहे हैं, और अभिभावक हर रोज़ दहशत में जी रहे हैं।

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ग्रामीणों की शासन-प्रशासन से गुहार –

हमारे बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार दीजिए, इससे पहले कि कोई हादसा ‘हेडलाइन’ बन जाए यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर सवाल है : क्या शासन-प्रशासन को किसी त्रासदी का इंतज़ार है ताकि कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जा सके? बच्चे स्कूल में ज्ञान पाने आते हैं, मौत नहीं।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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