निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। चाईबासा जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें एक करोड़ रुपये का इनामी और शीर्ष नक्सली नेता पतिराम मांझी उर्फ अनल दा मारा गया। इस कार्रवाई में उसके 10 से अधिक साथी नक्सली भी ढेर हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह झारखंड में नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन था पतिराम मांझी उर्फ अनल दा
पतिराम मांझी नक्सली संगठन का बेहद खतरनाक और प्रभावशाली चेहरा था। वह झारखंड के गिरिडीह जिले के झरहा बालेथान गांव का रहने वाला था और उसकी उम्र करीब 59 वर्ष बताई जा रही है। संगठन के भीतर वह सेंट्रल कमेटी (CC) का सदस्य था, जो नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में शामिल होता है।
इसके अलावा वह बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (BJSAC) का सचिव और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो (ERB) का सदस्य भी था। संगठन में उसे अनल दा, तूफान, पतिराम मरांडी और रमेश जैसे कई नामों से जाना जाता था।
तीन दशक से ज्यादा समय से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पतिराम मांझी वर्ष 1987 से नक्सली संगठन में सक्रिय था। वह लंबे समय से झारखंड, बिहार और आसपास के इलाकों में नक्सली हिंसा, हमलों और साजिशों की योजना बनाने में शामिल रहा। उसके पास अक्सर AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार रहते थे। झारखंड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी या मुठभेड़ में ढेर होने पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
सारंडा जंगल: नक्सलियों का मजबूत गढ़
चाईबासा का सारंडा इलाका वर्षों से नक्सलियों का मजबूत ठिकाना माना जाता रहा है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के कारण यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया था। यहां कई बंकर, हथियार डिपो और ट्रेनिंग ठिकाने बनाए गए थे। हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों ने लगातार ऑपरेशन चलाकर इन ठिकानों को ध्वस्त किया है।
लगातार कमजोर हो रहा नक्सली नेटवर्क
इससे पहले वर्ष 2025 में भी झारखंड में दो अन्य सेंट्रल कमेटी मेंबर — सहदेव सोरेन और प्रयाग मांझी — मुठभेड़ में मारे गए थे। अब पतिराम मांझी के मारे जाने के बाद झारखंड में कुल तीन CC मेंबर ढेर हो चुके हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि राज्य में नक्सली संगठन की कमर टूटती जा रही है।













