UN Social Development Commission 2026 : संयुक्त राष्ट्र में गूँजा भारत का ‘सबका साथ-सबका विकास’: सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र में भारत ने पेश किया विजन

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UN Social Development Commission 2026 : न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (CSocD) के 64वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की समावेशी और अधिकार-आधारित सामाजिक नीतियों का वैश्विक विवरण प्रस्तुत किया। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने इस सत्र में राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए रेखांकित किया कि भारत का विकास मॉडल ‘न्यायसंगत और समावेशी’ नीतियों पर आधारित है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘सबका साथ-सबका विकास’ और विकसित भारत 2047 श्रीमती ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं, बल्कि संवैधानिक गारंटी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए बताया कि यह दृष्टिकोण “विकसित भारत 2047” के दीर्घकालिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण के कारण आज भारत में कोई भी वर्ग पीछे नहीं छूट रहा है।Description: 82319d1393bff16a3d31c6e81a1f9b04.jpg

अंतिम छोर तक वितरण: भारत की प्रमुख राष्ट्रीय पहलें भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक प्रतिनिधियों के सामने भारत की उन सफल योजनाओं का विवरण रखा जिन्होंने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है:

  • शिक्षा में समानता: दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और आवासीय शिक्षा के माध्यम से बालक-बालिकाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
  • बुनियादी सुविधाएं: स्वच्छ पेयजल, रसोई गैस और स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार से महिलाओं और कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार आया है।
  • वित्तीय समावेशन: डिजिटल क्रांति और जनधन खातों के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को उद्यमिता और ऋण योजनाओं से जोड़ा गया है।
  • स्वास्थ्य और पोषण: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सुविधा पहुँचाई जा रही है।
  • सुरक्षा तंत्र: महिलाओं और बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी हेल्पलाइन और एकीकृत सेवा केंद्रों की स्थापना।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक सहयोग भारत ने सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की क्रांतिकारी भूमिका को दुनिया के सामने रखा। श्रीमती ठाकुर ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग और मजबूत बहुपक्षीय साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति इस 64वें सत्र की अध्यक्षता यूक्रेन की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत क्रिस्टीना हायोविशन ने की। सत्र को संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव सुश्री अमीना जे मोहम्मद और महासभा की अध्यक्ष महामहिम अन्नालेना बेरबॉक सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।

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