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जन विश्वास बिल 2025 : अब छोटे अपराधों पर जेल नहीं, सिर्फ चेतावनी और जुर्माना, पढ़े पूरी ख़बर

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सोमवार को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया। इस बिल के तहत 355 छोटे अपराधों को अपराधमुक्त किया गया है या जेल की सज़ा की जगह चेतावनी और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों की जिंदगी आसान बनाना और व्यापार-कारोबार में कानूनी रुकावटें हटाना है।

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जन विश्वास बिल 2025बिल के मुख्य बदलाव

  • पहली गलती पर चेतावनी, बार-बार गलती पर जुर्माना।
  • अधिकांश मामलों में जेल की सज़ा हटा दी गई।
  • कुल 16 कानूनों में 288 अपराधों को शामिल किया गया।
  • जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया आसान बनाई गई और अब इसे कर बकाया की तरह वसूला जा सकेगा।
  • प्रशासनिक स्तर पर फैसले होंगे ताकि अदालतों का बोझ कम हो।

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प्रमुख कानूनों में बदलाव

बैंकिंग और व्यवसाय:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934: रिपोर्ट न देने पर अब सिर्फ ₹1 लाख जुर्माना, जारी रहने पर ₹5,000 प्रतिदिन।
  • औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940: बिना लाइसेंस दवा बनाने/बेचने पर ₹30,000 जुर्माना।
  • चाय अधिनियम, 1953: नियम तोड़ने पर पहली बार चेतावनी, दोबारा करने पर ₹1 लाख जुर्माना।

मोटर वाहन और ट्रांसपोर्ट:

  • बिना परमिट वाहन चलाना, फिटनेस/इंश्योरेंस न रखना – ₹500–₹5,000 जुर्माना।

पर्यावरण और बीमा:

  • प्रदूषण नियम उल्लंघन पर पहले 5 साल जेल + ₹1 लाख, अब सिर्फ ₹5 लाख या उससे अधिक जुर्माना।
  • बीमा न लेने पर अब सिर्फ जुर्माना।

दिल्ली नगर निगम (NDMC) के तहत बदलाव:

  • कचरा न हटाना, सड़कों पर गंदगी करना, बिना अनुमति निर्माण करना – पहली बार चेतावनी, फिर ₹50–₹5,000 जुर्माना।
  • जल आपूर्ति से छेड़छाड़ या पानी की बर्बादी – ₹200–₹500 जुर्माना।
  • भवन निर्माण नियम तोड़ने पर ₹5,000 जुर्माना या 6 महीने कैद।
  • कुत्तों को बिना जंजीर छोड़ना – ₹1,000 जुर्माना।

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प्रशासनिक बदलाव

  • न्यायनिर्णायक अधिकारी नोटिस जारी कर जुर्माना लगा सकेंगे।
  • अपील प्राधिकारी को आदेश 6 महीने में निपटाना होगा।
  • पुलिस केवल प्रशासक द्वारा अधिकृत मामलों में कार्रवाई करेगी।

सरकार का तर्क

केंद्र सरकार का कहना है कि छोटे अपराधों पर जेल देना अनुचित और कठोर है। बिल के लागू होने से व्यापारियों, उद्योगों और आम नागरिकों को राहत मिलेगी और अदालतों व पुलिस पर बोझ कम होगा।

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