Sanjay Gandhi Hospital : रीवा। संभागीय संजय गांधी अस्पताल (SGH) में स्थानीय स्तर पर पूर्व में दवा आपूर्ति करने वाले एक मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा किए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार को उजागर करने के कुछ ही घंटों बाद, प्रशासनिक अमले ने अन्नपूर्णा ड्रग हाउस नामक उस मेडिकल स्टोर को आनन-फानन में सील कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश है या फिर सच्चाई को दबाने का प्रयास? सीएमएचओ डॉ. संजीव शुक्ला ने हालांकि इस कार्रवाई को मेडिकल स्टोर संचालक का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर किया जाना बताया है।
वीडियो वायरल: चिकित्सकों और संचालकों के बीच कमीशन के ‘खेल’ का खुलासा
दरअसल, गुरुवार की सुबह अन्नपूर्णा ड्रग हाउस उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब उसके संचालक दलबीर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल हुए इस वीडियो में ड्रग हाउस संचालक दलबीर ने रीवा के चिकित्सा जगत के कुछ स्याह पहलुओं को उजागर कर दिया। उन्होंने न सिर्फ चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच चल रहे कमीशन के खेल का खुलासा किया, बल्कि दवाइयों की गुणवत्ता और बाजार में नकली दवाइयों के प्रचलन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। पूर्व में दवा आपूर्तिकर्ता रहे दलबीर ने अपने वीडियो में संजय गांधी अस्पताल के एक चिकित्सक का नाम लेते हुए उसे व्यापक भ्रष्टाचार में लिप्त बताया।
Sanjay Gandhi Hospital : प्रशासनिक अमला हरकत में, भ्रष्टाचार छिपाने के लिए ‘जांच’ का राग
ड्रग हाउस संचालक का यह विस्फोटक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही चिकित्सा महकमे की जबरदस्त किरकिरी शुरू हो गई। मामले को बढ़ता देख, जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने तत्काल हस्तक्षेप किया और मेडिकल स्टोर को सील करने का फरमान जारी कर दिया। प्रशासनिक अमला दलबल के साथ अन्नपूर्णा ड्रग हाउस पहुंचा और उसे सील कर दिया गया। वहीं, वायरल वीडियो में सिस्टम में व्याप्त गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जब मीडिया ने सवाल किया, तो सीएमएचओ डॉ. संजीव शुक्ला ने जांच का राग अलापते हुए चुप्पी साध ली। सीएमएचओ ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीधा जवाब देने के बजाय मामले को ‘जांच के बाद कार्रवाई’ तक सीमित रखने की बात कही है।
अस्पताल के पूर्व सप्लायर के आरोपों पर गंभीर सवाल
अन्नपूर्णा ड्रग हाउस के संचालक द्वारा लगाया गया आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। एक पूर्व दवा आपूर्तिकर्ता द्वारा कमीशनखोरी, खराब गुणवत्ता और नकली दवाओं के संबंध में खुलासे से यह साफ है कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं व्याप्त हैं। भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले पर ही कार्रवाई हो जाने से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिस्टम अपनी खामियों को छिपाने के लिए दबाव की राजनीति कर रहा है। जनता की मांग है कि मेडिकल स्टोर सील करने के साथ-साथ वायरल वीडियो के मूल आरोपों पर भी पारदर्शी तरीके से कार्रवाई की जाए।
Sanjay Gandhi Hospital : सीएमएचओ की चुप्पी और जनता की अपेक्षाएं
सीएमएचओ डॉ. संजीव शुक्ला की इस मामले में चुप्पी और ‘जांच का हवाला’ देकर भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश से नागरिकों में रोष है। वायरल वीडियो में नामजद किए गए चिकित्सक पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि कमीशनखोरी के इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो सके। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन केवल मेडिकल स्टोर को सील करने की कार्रवाई तक ही सीमित रहता है या फिर कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर भ्रष्टाचार के मूल कारणों की भी गहराई से जांच करवाई जाती है। जनता को इंतजार है कि इस बड़े खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।











