Jabalpur Road Safety Seminar 2026 : जबलपुर: संस्कारधानी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और असमय काल के गाल में समाती मासूम जिंदगियों को बचाने के लिए जबलपुर पुलिस ने एक विशेष ‘सड़क सुरक्षा सेमिनार’ का आयोजन किया। इस सेमिनार में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अमला, शहर के गणमान्य नागरिक और वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साल 2025 के कड़वे अनुभवों से सीख लेकर 2026 के लिए एक मजबूत सुरक्षा रोडमैप तैयार करना रहा।
आंकड़ों ने चौंकाया:
सेमीनार के दौरान साल 2025 के दुर्घटना आंकड़ों को साझा किया गया, जो बेहद डराने वाले हैं। पिछले वर्ष जिले में कुल 3382 सड़क हादसे हुए, जिनमें 3970 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और 630 लोगों की मौत हो गई। इन आंकड़ों ने यह साफ कर दिया कि केवल चालानी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़क इंजीनियरिंग और जन-जागरूकता में बड़े बदलाव की जरूरत है।
विशेषज्ञों और पत्रकारों के सुझाव:
सेमिनार में मौजूद वरिष्ठ पत्रकारों ने भी अपने अनुभव साझा किए। सुझाव दिया गया कि शहर के ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं) को चिन्हित कर वहां लाइटिंग और रंबल स्ट्रिप्स लगाई जाएं। साथ ही, भारी वाहनों के प्रवेश के समय और हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर सख्त कदम उठाने की बात कही गई।
पुलिस का पक्ष:
जबलपुर एसपी सम्पत उपाध्याय ने बताया कि पुलिस अब डेटा-आधारित रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 2026 के अभियान के तहत स्कूलों-कॉलेजों में शिक्षा, सड़कों के बुनियादी ढांचे में सुधार और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए लगाम कसी जाएगी।
दुर्घटना डायरी 2025 (Statistics)
| विवरण | संख्या (वर्ष 2025) |
| कुल सड़क दुर्घटनाएं | 3382 |
| घायलों की संख्या | 3970 |
| मृतकों की संख्या | 630 |
| मुख्य कारण | ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग |
अभियान 2026 के मुख्य बिंदु
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ब्लैक स्पॉट सुधार: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का पुनर्मूल्यांकन।
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हेलमेट जागरूकता: “हेलमेट नहीं तो फ्यूल नहीं” जैसे नवाचारों पर विचार।
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डिजिटल चालान: सीसीटीवी कैमरों के जरिए नियमों के उल्लंघन पर नजर।
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युवाओं को संदेश: स्कूलों में ट्रैफिक नियमों की अनिवार्य वर्कशॉप।

