Tuesday, September 29, 2026
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Iron scam : भोपाल नगर निगम में ‘लोहा घोटाला’ : 240 मीटर की नाली में कागजों पर खपा दिया 16 टन सरिया

Iron scam : भोपाल: राजधानी के नगर निगम में संबल घोटाले की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब एक नया ‘लोहा घोटाला’ सामने आया है। मामला वार्ड क्रमांक-53 स्थित भेल संगम कॉलोनी का है, जहां मात्र 240 मीटर लंबी और 3 फीट चौड़ी नाली को RCC से ढंकने के नाम पर भारी अनियमितता बरती गई है। निगम के रिकॉर्ड में इस छोटी सी नाली के लिए करीब 16,139 किलोग्राम (16 टन) सरिया लगना दिखाया गया है, जिसकी बाजार में कीमत लाखों में है।

हैरानी की बात यह है कि निगम के इंजीनियर बिना मौके पर पहुंचे ही इस प्रोजेक्ट का 13 लाख रुपए का बिल पास करवाना चाहते थे। दस्तावेजों के अनुसार, असिस्टेंट इंजीनियर निशांत तिवारी ने प्रोजेक्ट में 16 टन से अधिक सरिये का इस्तेमाल दर्ज किया था। लेकिन जब फाइल भुगतान के लिए आगे बढ़ी, तो निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को इसमें गड़बड़ी की आशंका हुई। कमिश्नर ने तत्काल भुगतान पर रोक लगाते हुए नाली की ‘कोर-कटिंग’ कर जांच करने के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं।

इस पूरे फर्जीवाड़े में प्रभारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) बृजेश कौशल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान श्री कौशल ने एक बार भी साइट का दौरा नहीं किया और दफ्तर में बैठकर ही कागजी कार्रवाई को हरी झंडी दे दी। नियमानुसार, इतने बड़े निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच उच्च अधिकारियों द्वारा मौके पर अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए थी।

मामले में प्रशासनिक सुस्ती भी देखने को मिल रही है। 5 दिसंबर को नोटिस जारी होने और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण किए जाने के बावजूद, EE बृजेश कौशल ने अब तक निगम कमिश्नर को कोर-कटिंग की रिपोर्ट पेश नहीं की है। रिपोर्ट जमा करने में हो रही देरी यह संकेत दे रही है कि विभाग के भीतर ही मामले को रफा-दफा करने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश हो सकती है।

नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि यदि कोर-कटिंग की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि नाली के भीतर वास्तव में कितना लोहा लगा है और कितना केवल फाइल में दर्ज है। इस घोटाले के उजागर होने से निगम के निर्माण कार्यों में चल रहे भ्रष्टाचार और इंजीनियरों व ठेकेदारों की मिलीभगत की पोल खुलती नजर आ रही है। अब सबकी नजरें कमिश्नर की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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