नई दिल्ली। Iran-Israel War : पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इज़राइल टकराव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। जैसे-जैसे टकराव गहराता जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें चढ़ रही हैं और इसका सीधा दबाव भारतीय रुपया और घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।
Iran-Israel War : सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, वहीं कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस सिलेंडर तक की कीमतें बढ़ सकती हैं।
शेयर बाजार में दिखा डर
सप्ताह की शुरुआत बाजार के लिए कमजोर रही। निवेशकों में चिंता इस बात की है कि अगर टकराव लंबा खिंचता है, तो भारत जैसे तेल आयातक देश को बड़ा झटका लग सकता है। ट्रांसपोर्ट, एविएशन और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर इसका सीधा असर होगा।
Iran-Israel War
खर्च बढ़ेगा, जेब पर आएगी मार
भारत अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है। अगर तेल महंगा होता है, तो सरकार की सब्सिडी और लॉजिस्टिक्स लागत दोनों बढ़ती हैं। ऐसे में गैस, खाद्य पदार्थ, ट्रांसपोर्ट, दूध, सब्ज़ियों तक की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञ बोले- हर दिन बढ़ता जोखिम
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर युद्ध जल्द नहीं थमता, तो रुपये की गिरावट और महंगाई की रफ्तार को थामना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में आम उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत तक को झटका लग सकता है।
सरकार ने भले अभी कोई अलर्ट नहीं जारी किया हो, लेकिन बाज़ार की चाल और तेल की उछाल बता रही है कि भारत के लिए यह युद्ध सिर्फ भूगोल का नहीं, जेब का भी संकट बनने जा रहा है।













