इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मचे हाहाकार के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खुद मोर्चा संभालने इंदौर पहुंचे। शहर के चार अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों का हाल जानने के बाद मुख्यमंत्री ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक अधिकारियों की आपात बैठक ली। मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण को ‘बेहद गंभीर’ बताते हुए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे को तत्काल इंदौर में तैनात कर पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
40 हजार लोगों की हुई स्क्रीनिंग: प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासन अब तक प्रभावित क्षेत्र में 40 हजार लोगों की स्क्रीनिंग कर चुका है, जिसमें से 2,500 से अधिक लोग बीमार पाए गए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हुई है। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी कि “लापरवाही करने वाले किसी भी जिम्मेदार को बख्शा नहीं जाएगा।”
सीवर लाइन की लीकेज पर फोकस: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिलने की आशंका है, वहां कल से युद्धस्तर पर सुधार कार्य शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि सुधार के बाद पूरी सावधानी बरतते हुए ही जल प्रदाय फिर से शुरू किया जाएगा। बैठक में अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए भोपाल से अतिरिक्त स्टाफ भेजने का फैसला भी लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पीड़ितों को हरसंभव उपचार दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।













