इंदौर: एम वाय अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अस्पताल में पहले चूहा कांड और एक्सपायरी डेट वाली दवा देने के मामले के बाद अब एक और गंभीर गलती सामने आई है। अस्पताल में भर्ती मरीज की मेडिकल फाइल गुम हो गई, और मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया।
घटना उस समय और गंभीर हो गई जब पांच घंटे तक मरीज की फाइल नहीं मिली। जूनियर डॉक्टरों ने बाद में स्वीकार किया कि फाइल गुम हो गई थी। इसके चलते मरीज का पोस्टमार्टम बिना मेडिकल हिस्ट्री के किया गया, जो अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
एक्सपायरी बोतल मामले में हुई कार्रवाई
एम वाय अस्पताल में हाल ही में एक्सपायरी बोतल देने के मामले में भी जांच समिति ने बड़ी कार्रवाई की है। तीन नर्सिंग ऑफिसरों को दोषी पाया गया। नर्सिंग ऑफिसर आसमां अंजुम को निलंबित किया गया, जबकि नर्स नैना गौतम की वेतन वृद्धि रोकी गई। नर्सिंग हेड एंजलिना विल्फ्रेड के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
अस्पताल प्रशासन में विरोधाभासी बयान
घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन के बयानों में विरोधाभास सामने आया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने शुरुआत में घटना से इनकार किया था, जबकि एमजीएम डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बाद में घटना को स्वीकार किया। इस विरोधाभास ने अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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परिजनों का गुस्सा और सार्वजनिक चिंता
मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा उग्र हो गया। उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह घटना अस्पताल के प्रशासनिक ढांचे और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाती है।













