इंदौर: इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। भागीरथपुरा निवासी 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि इलाके में लंबे समय से गंदे पानी की शिकायतें होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
घटना की पूरी जानकारी
हेमंत गायकवाड़ की तबीयत 22 दिसंबर को बिगड़ गई थी, जब उन्होंने दूषित पानी पीया। इसके बाद उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत पर पहले नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। तबीयत न सुधरने पर उन्हें अरविंदो अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।परिवार ने बताया कि हेमंत गायकवाड़ चार बेटियों के पिता और परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। वह ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर बसर करते थे।
इलाके में लंबे समय से पानी की समस्या
भागीरथपुरा क्षेत्र के निवासियों ने कई बार गंदे पानी की शिकायतें नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से समस्या बनी हुई है और इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों में उल्टी, दस्त और संक्रमण आम हैं, और समय पर उपाय न किए जाने पर यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
परिवार और नागरिकों की मांग
हेमंत की मौत के बाद परिवार और स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से इलाके में जल सुरक्षा और पानी की जांच की मांग तेज कर दी है। लोग चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
नगर निगम की जिम्मेदारी
नगर निगम और जल आपूर्ति विभाग को जल स्रोतों की सफाई और नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की गुणवत्ता की सतत निगरानी और फिल्टरिंग सिस्टम लगाए बिना नागरिकों की सुरक्षा खतरे में रहती है।
बता दे कि इंदौर में दूषित पानी के कारण अब तक एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो चुके है। अभी भी 20 से ज्यादा लोग भर्ती है। सात लोग आईसीयू में भर्ती है। दूषित पानी से अब तक 25 मौतें हो चुकी है। जिनमें ज्यादातर महिलाए है। 40 साल से कम उम्र के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें छह माह का एक बच्चा भी शामिल है। भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की गूंज प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली तक भी पहुंच चुकी है।











