इंदौर : देश के सबसे साफ शहर के तौर पर पहचान बना चुके इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई से हड़कंप मच गया है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति में शौचालय का गंदा पानी मिलने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 35 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के बाद प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीएम मोहन यादव के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर कलेक्टर ने दो अधिकारियों को निलंबित और एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की तह तक जाने के लिए जांच समिति का गठन किया गया है, जो लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगी।
इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना बेहद दुखद है। मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपचाररत प्रभावितों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
मृतकों के परिवारजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। स्थिति पर नजर…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) December 30, 2025
कैसे दूषित हुआ नर्मदा का पानी?
जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज हो गया था। यह लीकेज इतना खतरनाक था कि पुलिस चौकी के शौचालय का गंदा पानी सीधे पाइपलाइन में मिल रहा था। इसी पानी की सप्लाई पूरे इलाके में हो रही थी, जिससे लोग बीमार पड़ने लगे। शुक्रवार से मरीजों के सामने आने का सिलसिला शुरू हुआ।
तीन दिन बाद मिला लीकेज पॉइंट
वार्ड 11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने सबसे पहले इस समस्या की जानकारी महापौर को दी थी। इसके बाद नगर निगम की टीम ने जांच शुरू की और तीन दिन बाद लीकेज प्वाइंट का पता चला। यह पॉइंट पानी की टंकी के पास और भागीरथपुरा पुलिस चौकी के ठीक नीचे था, जहां चौकी का बाथरूम बना हुआ है।
30 साल पुरानी पाइपलाइन बनी खतरे की वजह
बताया जा रहा है कि नर्मदा की यह पाइपलाइन 30 साल से भी ज्यादा पुरानी है। बाद में इसी के ऊपर पुलिस चौकी का निर्माण हुआ, लेकिन तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। अब सुधार कार्य कर दिया गया है और दावा किया जा रहा है कि जल आपूर्ति सुरक्षित कर दी गई है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
पार्षद कमल वाघेला का कहना है कि पाइपलाइन और पुलिस चौकी निर्माण के समय जिम्मेदार अधिकारी अब इंदौर में पदस्थ नहीं हैं, लेकिन लापरवाही की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।













