निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। इस डील की दुनिया भर में तारीफ हो रही है। अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने इसे भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम बताया है। यह समझौता भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माना जा रहा है।
पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
जहां एक ओर दुनिया भारत की इस उपलब्धि की सराहना कर रही है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में चिंता और बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि India-EU डील का सीधा असर पाकिस्तान को मिलने वाली जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस (GSP+) योजना पर पड़ सकता है।
पूर्व पाक मंत्री ने जताया डर
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने इस डील को लेकर खुलकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि India-EU व्यापार समझौते से पाकिस्तान के निर्यात पर गंभीर जोखिम बढ़ गया है। उनका मानना है कि इस डील के बाद पाकिस्तान को मिलने वाला शून्य टैरिफ लाभ खत्म हो सकता है।
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9 अरब डॉलर के निर्यात पर संकट
डॉ. एजाज के अनुसार, GSP+ योजना के तहत पाकिस्तान का लगभग 9 अरब डॉलर का निर्यात यूरोपीय बाजार में निर्भर था। यदि यह सुविधा समाप्त होती है, तो पाकिस्तानी उत्पादों पर फिर से टैरिफ लगेंगे, जिससे उनकी कीमतें बढ़ेंगी और प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
महंगाई और बेरोजगारी का खतरा
पूर्व वाणिज्य मंत्री ने चेतावनी दी कि टैरिफ लागू होने से न सिर्फ महंगाई बढ़ेगी, बल्कि करीब 1 करोड़ नौकरियों पर भी खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने कहा कि पाक उद्योग पहले ही दबाव में है और अब अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है।
अन्य देशों से भी बढ़ी चुनौती
डॉ. एजाज ने यह भी माना कि भारत के अलावा वियतनाम और बांग्लादेश ने अपनी उत्पादन क्षमता काफी बढ़ा ली है। ऐसे में पाकिस्तान को तुरंत ठोस रणनीति बनानी होगी, वरना वह वैश्विक व्यापार में और पिछड़ सकता है।
GSP+ को लेकर अनिश्चितता
अब तक GSP+ योजना के तहत यूरोपीय संघ ने करीब 7200 से अधिक उत्पादों पर 0% कस्टम ड्यूटी की सुविधा दी थी। लेकिन India-EU डील के बाद आशंका जताई जा रही है कि यह विशेष योजना बंद हो सकती है, जिससे पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है।













