IGKV Student Protest: IGKV में खराब रिजल्ट पर छात्रों का हंगामा, प्रशासनिक भवन का घेराव; ‘एक कचौड़ी दो समोसा, फैकल्टी का क्या भरोसा’ के लगाए नारे

Sanjay Sahu
IGKV Student Protest

IGKV Student Protest: रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में खराब परीक्षा परिणाम को लेकर छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को विद्यार्थियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ‘एक कचौड़ी दो समोसा, फैकल्टी का क्या भरोसा’ लिखी तख्तियां दिखाकर विरोध जताया। प्रदर्शन को NSUI का भी समर्थन मिला।

IGKV Student Protest: मामला बीएससी कृषि के सेकेंड सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम से जुड़ा है। हाल ही में जारी रिजल्ट के बाद कई कृषि कॉलेजों में विद्यार्थियों की असफलता को लेकर नाराजगी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, कांकेर कृषि कॉलेज में 107 विद्यार्थियों में से 100 छात्र फेल हो गए। इसके बाद परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

IGKV Student Protest: छात्रों की 5 प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की। इसके अलावा ईयर बैक सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने और इस संबंध में स्थायी नियम बनाने की मांग उठाई गई।

छात्रों की अन्य मांगों में चार विषयों में पुनर्मूल्यांकन की सुविधा, पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफ करना, ग्रेस मार्क्स बढ़ाना और RTI के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में लागू ‘बुक रेफरेंस’ के नियम को समाप्त करना शामिल है।

विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।

IGKV Student Protest: पुनर्मूल्यांकन की सीमा 2 से बढ़ाकर 4 विषय हुई

IGKV Student Protest: छात्रों की मांगों के बीच ABVP के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल से मुलाकात कर निशुल्क पुनर्मूल्यांकन सहित अन्य मुद्दों को उठाया। चर्चा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुनर्मूल्यांकन के लिए विषयों की सीमा दो से बढ़ाकर चार कर दी है। इससे विद्यार्थी अब चार विषयों में पुनर्मूल्यांकन करा सकेंगे। हालांकि, पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफ करने और अन्य मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का क्या फैसला होगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब विद्यार्थियों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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