Chhattisgarh Petrol Pump: रायपुर। एक ओर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा बोझ आम जनता की जेब पर लगातार बढ़ रहा है। वहीं इसके विपरीत दूसरी ओर पेट्रोल पंपों पर मिलने वाली बेहद बुनियादी और अनिवार्य सुविधाओं के लिए भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी रायपुर, दुर्ग, भलाई, अभनपुर, राजिम और धमतरी सहित प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर हवा भरने की मशीनें पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। कहीं हवा की मशीन महीनों से खराब पड़ी है तो कहीं उसका मुख्य नोजल टूटा हुआ है।
कई पेट्रोल पंपों पर तो हवा भरने के लिए कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं रहता है। पेट्रोलियम कंपनियों के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पूरी तरह से निशुल्क हवा भरने की सुविधा उपलब्ध कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके साथ ही हर पंप पर स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा किट जैसी मूलभूत सुविधाएं भी हर वक्त उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
जमीन पर दावों की खुली पोल और भटकते लोग
शहरों और गांवों की जमीनी हकीकत इन सरकारी नियमों से बिल्कुल अलग और निराशाजनक दिखाई देती है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों का साफ तौर पर कहना है कि टायर में हवा कम होने पर वे भरोसा करके पेट्रोल पंप पहुंचते हैं। इसके अलावा अधिकांश स्थानों पर उन्हें मशीन खराब होने का बोर्ड लगा मिलता है या फिर कर्मचारी मना कर देते हैं। ऐसी मजबूरी की स्थिति में लोगों को पास की निजी पंचर दुकानों में जाकर पैसे खर्च करके अपने वाहनों में हवा भरवानी पड़ती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर रूप ले चुकी है। इन इलाकों में कई किलोमीटर तक दूसरा कोई व्यावसायिक विकल्प या पंचर की दुकान आसानी से उपलब्ध नहीं होती है। ऐसे में वाहन चालकों को कम हवा के साथ ही गाड़ी चलाने पर मजबूर होना पड़ता है जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
भीषण उमस में पेयजल की व्यवस्था भी पूरी तरह ठप
प्रदेश में चल रही भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रा करने वाले मुसाफिरों को पीने के साफ पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके बावजूद कई पेट्रोल पंपों पर लगाए गए वाटर कूलर या तो बिजली कनेक्शन न होने से बंद पड़े हैं या फिर उनमें पेयजल की कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले बस और कार यात्रियों को इस भीषण लापरवाही के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
नियमों के मुताबिक पेट्रोल पंप परिसर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग साफ-सुथरे शौचालय का होना भी अनिवार्य किया गया है। लेकिन अधिकांश पंपों पर इन शौचालयों में ताले लटके मिलते हैं या फिर वहां इस कदर गंदगी पसरी रहती है कि कोई उनका इस्तेमाल नहीं कर सकता। कागजों में ये तमाम सुविधाएं रोजाना सुचारू रूप से संचालित दिखाई जाती हैं लेकिन जमीन पर संचालकों की घोर लापरवाही साफ उजागर होती है।
निरीक्षण के अभाव में बेलगाम हुए पंप संचालक
उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और तेल कंपनियों के नियमित निरीक्षण तथा निगरानी के अभाव में ही संचालक इन नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जब पेट्रोल पंपों को संचालन का कीमती लाइसेंस दिया जाता है, तब इन सभी सुविधाओं को अनिवार्य शर्तों में शामिल किया जाता है। इसके साथ ही हर पेट्रोल पंप पर एक शिकायत पुस्तिका का होना भी जरूरी है ताकि आम जनता अपनी समस्याओं को दर्ज करा सके।
ज्यादातर पंपों पर आम उपभोक्ताओं को शिकायत पुस्तिका मांगने पर भी नहीं दी जाती है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने अब जिला प्रशासन, तेल कंपनियों और संबंधित खाद्य विभाग से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की जोरदार मांग की है। अंततः, लोगों का कहना है कि नियमों का खुला उल्लंघन करने वाले और बुनियादी सुविधाएं न देने वाले ऐसे डिफाल्टर पेट्रोल पंपों पर तत्काल कड़ा जुर्माना लगाया जाना चाहिए और उनके लाइसेंस निलंबित करने जैसी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।









