Monday, October 5, 2026
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Gwalior News : नकली शस्त्र लाइसेंस बनाकर लाखों की ठगी, पुलिस ने दबोचे 3 लोग….

Gwalior News
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ग्वालियर, मध्य प्रदेश: Gwalior News : ग्वालियर में शस्त्र लाइसेंस को लेकर बरती जा रही सख्ती का फायदा उठाकर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहाँ नकली बंदूक और पिस्टल के लाइसेंस बनाकर भोले-भाले लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

 Gwalior News : शातिर गिरोह ने बनाए जाली लाइसेंस: ग्वालियर-चंबल अंचल में हथियार रखना लोग अपनी शान समझते हैं। प्रदेश में गृह मंत्रालय द्वारा पिस्टल, रिवाल्वर और बंदूक के लाइसेंस जारी करने में हालिया सख्ती के बाद, एक फर्जी लाइसेंस बनाने वाला गिरोह सक्रिय हो गया था। यह गिरोह कथित तौर पर ग्वालियर में प्रशासन की नाक के नीचे पिस्टल के फर्जी लाइसेंस जारी कर रहा था।

पुलिस के हाथ तीन ऐसी फर्जी लाइसेंस डायरियाँ लगी हैं, जो पूरी तरह से हाथ से लिखी गई हैं। इनमें अपर कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर और सील के साथ-साथ कलेक्टर, ग्वालियर के हूबहू हस्ताक्षर भी बनाए गए हैं। इन सभी आवेदकों का संबंध ग्वालियर से है। बताया जा रहा है कि इन नकली डायरियों के नाम पर लोगों से 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली गई है।

सामने आए तीन फर्जी लाइसेंस:

  • पहला फर्जी पिस्टल लाइसेंस महाराजपुरा थाना क्षेत्र के ऐंदल सिंह का है, जिसमें सभी विवरण हाथ से भरे गए हैं।
  • दूसरा फर्जी लाइसेंस न्यू राम विहार कॉलोनी के अमित सिंह का मिला है, जिसमें यूनिक आईडी में वर्ष 2027 तक की वैधता दर्शाई गई है। इसमें भी सील और हस्ताक्षर सभी फर्जी पाए गए हैं।
  • तीसरा लाइसेंस रामनिवास सिंह का है, जिसमें फोटो भी लगा है और इसमें 2026 तक का यूनिक आईडी नंबर डाला गया है। इन सभी से मोटी रकम वसूली गई है।

प्रशासन सख्त, जांच जारी: अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) टी.एन. सिंह ने बताया कि तीन फर्जी डायरियाँ सामने आई हैं और इस पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र सिंह जाटव ने पुष्टि की है कि तीन संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद ही इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और उनकी भूमिका का खुलासा हो पाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह फर्जीवाड़ा ग्वालियर में शस्त्र लाइसेंस प्रणाली में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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