Gharghoda News: गौरी शंकर गुप्ता /घरघोडा । तमनार तहसील क्षेत्र के ग्राम बड़गांव के किसानों ने बी.एस. कंपनी पर कृषि भूमि खरीदने के दौरान किए गए कथित आश्वासनों और बाद में उनसे पीछे हटने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि कंपनी द्वारा भूमि क्रय के समय रोजगार, भूमि उपयोग और खेती से जुड़े कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन भूमि कंपनी के नाम होने के बाद कथित तौर पर किसानों की समस्याओं और मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मामले को लेकर प्रभावित किसानों एवं ग्रामवासियों ने कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष जनदर्शन में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भूमि खरीदते समय दिए गए थे कई आश्वासन
किसानों द्वारा कलेक्टर को दिए गए आवेदन के अनुसार, भूमि क्रय के समय कंपनी की ओर से किसानों के समक्ष कथित रूप से कई बातें रखी गई थीं। शिकायत में प्रमुख रूप से कहा गया है कि—
कंपनी का दरवाजा सभी किसानों के लिए 24 घंटे खुला रहेगा।
किसानों के परिवार के सदस्यों को उनकी योग्यता के अनुसार कंपनी में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। जब तक कंपनी खरीदी गई भूमि का औद्योगिक उपयोग नहीं करेगी, तब तक किसान लगभग 10 से 12 वर्षों तक उस भूमि पर खेती कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इन आश्वासनों पर विश्वास करते हुए उन्होंने अपनी पुश्तैनी/कृषि भूमि कंपनी को बेच दी।
Gharghoda News: भूमि कंपनी के नाम हुई तो बदल गया कथित रवैया
शिकायत में किसानों ने आरोप लगाया है कि भूमि क्रय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। प्रभावित परिवारों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिलने की बात कही गई है। वहीं, जिन जमीनों का अभी तक औद्योगिक उपयोग नहीं हुआ है, उन पर भी किसानों को पहले बताए गए आश्वासन के अनुसार खेती करने की अनुमति नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
किसानों के मुताबिक, जिस भरोसे पर उन्होंने अपनी कृषि भूमि कंपनी को दी थी, उसी भरोसे के टूटने से प्रभावित परिवारों के सामने रोजगार, आय और भविष्य की सुरक्षा को लेकर संकट खड़ा हो गया है।
कंपनी प्रबंधन से मिलने पहुंचे तो भी समस्या का आरोप
आवेदन में किसानों ने कंपनी प्रबंधन से संपर्क करने का भी उल्लेख किया है। शिकायत के अनुसार, किसान जब अपनी समस्याएं लेकर कंपनी प्रबंधन के पास पहुंचे तो उन्हें कथित तौर पर पहले किए गए वादों के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
शिकायत में कंपनी के प्रबंधक प्रदीप राठौर का भी उल्लेख करते हुए किसानों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुराने वादों को लेकर कथित तौर पर यह कहकर लौटा दिया गया कि “जो बातें पहले कही गई थीं, उन्हें भूल जाओ।” किसानों का यह भी आरोप है कि कंपनी के मुख्य द्वार पर उन्हें अधिकारियों से मुलाकात का अवसर नहीं दिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच होना अभी बाकी है।
किसानों ने जांच के साथ रखीं छह प्रमुख मांगें
प्रभावित किसानों ने कलेक्टर से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कई बिंदुओं पर कार्रवाई का अनुरोध किया है। इनमें प्रमुख रूप से—
1. पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. भूमि क्रय के समय किसानों से किए गए सभी आश्वासनों एवं वादों की जांच की जाए।
3. प्रभावित किसानों एवं उनके परिवारों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया या नहीं, इसकी जांच की जाए।
4. जिन भूमियों का अभी तक औद्योगिक उपयोग नहीं हुआ है, वहां किसानों को पूर्व आश्वासन के अनुसार खेती करने की अनुमति देने के संबंध में कार्रवाई की जाए।
5. यदि भूमि क्रय के दौरान किसानों के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत आश्वासन की पुष्टि होती है तो कंपनी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
6. किसानों की शिकायतों के निराकरण के लिए जिला प्रशासन की उपस्थिति में कंपनी प्रबंधन एवं प्रभावित किसानों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए।
“खेती की जमीन के बदले रोजगार और न्याय का भरोसा मिला था”
किसानों ने अपने आवेदन में कहा है कि उन्होंने कंपनी पर विश्वास करते हुए अपनी जीवन-यापन का प्रमुख आधार कृषि भूमि कंपनी को दी थी। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी और भविष्य का आधार थी।
अब किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की दस्तावेजों के आधार पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि भूमि क्रय के समय वास्तव में क्या आश्वासन दिए गए थे, उनका पालन कितना हुआ और प्रभावित परिवारों को क्या लाभ मिला।
जनदर्शन में पहुंची शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच पर निगाहें
किसानों द्वारा कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है तो भूमि क्रय के दस्तावेज, किसानों से किए गए लिखित/मौखिक आश्वासन, रोजगार से संबंधित रिकॉर्ड, भूमि के वर्तमान उपयोग और कंपनी प्रबंधन के दस्तावेज महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
Gharghoda News: अब बड़ा सवाल यही है—क्या भूमि लेने के समय किसानों से किए गए वादों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा और क्या प्रभावित किसानों को उनके कथित अधिकार एवं आश्वासनों का वास्तविक लाभ मिल पाएगा? नोट: समाचार में कंपनी और प्रबंधन के संबंध में दिए गए आरोप शिकायत में किसानों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच/पुष्टि होना शेष है।






