भूपेश बघेल : रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इस याचिका पर सोमवार, 5 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की गई है। सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच द्वारा की जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री को आशंका है कि उनके खिलाफ भी उसी तरह की कार्रवाई हो सकती है जैसी उनके बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ हुई। गौरतलब है कि ईडी ने जुलाई में शराब घोटाले से जुड़े एक मामले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि चैतन्य ने कथित शराब सिंडिकेट की मदद की थी और ब्लैकमनी को व्हाइट करने की प्रक्रिया में शामिल रहे। ईडी के अनुसार, इससे उन्हें लगभग 16 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने व्यवसाय विस्तार में किया।
पूर्व मुख्यमंत्री के आवास पर ईडी ने लगातार दो बार छापेमारी की थी। पहली बार करीब 10 घंटे तक चली कार्रवाई में 25 लाख नकद और कई दस्तावेज बरामद किए गए थे। जुलाई माह में हुई दूसरी दबिश के दौरान ईडी ने उनके बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया। इन घटनाओं के बाद गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भूपेश बघेल ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की।
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पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ में तीन बड़े घोटाले सामने आए — शराब घोटाला, कोयला घोटाला और महादेव सट्टा ऐप घोटाला। इन सभी मामलों में ईडी, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और सीबीआई सक्रियता से जांच कर रही हैं। ईडी द्वारा दायर चार्जशीटों और छापों में भूपेश बघेल का नाम लगातार उभरता रहा है।
अपनी याचिका में बघेल ने न सिर्फ अग्रिम जमानत की मांग की है, बल्कि सीबीआई और ईडी की जांच करने की शक्तियों और उनके अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी है। बघेल की दलील है कि उन्हें राजनीति से प्रेरित होकर निशाना बनाया जा रहा है।
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इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और यदि किसी ने भ्रष्टाचार किया है तो कार्रवाई तय है। छत्तीसगढ़ की सियासत में यह मामला आगामी राज्योत्सव और विधानसभा सत्र के पहले बड़े सियासी तनाव का कारण बनता दिख रहा है।











