Thursday, August 20, 2026
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Yati Narsinghanand Gwalior Visit : ग्वालियर में फिर गूंजी गोडसे की आरती: हिंदू महासभा दफ्तर में यति नरसिंहानंद ने की पूजा; यूजीसी और मिडिल ईस्ट संकट पर दिए बड़े बयान

Yati Narsinghanand Gwalior Visit : ग्वालियर | 29 मार्च 2026 ग्वालियर के दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा के कार्यालय में रविवार को एक बार फिर नाथूराम गोडसे की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस कार्यक्रम में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और डासना पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज मुख्य रूप से सम्मिलित हुए। गोडसे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और आरती के बाद पीठाधीश्वर ने मीडिया से चर्चा करते हुए सावरकर, यूजीसी के नियमों और वैश्विक संघर्षों पर तीखे विचार रखे।

सावरकर को भारत रत्न की मांग पर बोले पीठाधीश्वर

वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने के सवाल पर यति नरसिंहानंद ने कहा कि सावरकर जी का व्यक्तित्व इतना विराट है कि उनके लिए किसी सम्मान की औपचारिकता जरूरी नहीं है, लेकिन यह सरकार का कर्तव्य है कि उन्हें उचित सम्मान देकर गौरवान्वित महसूस करे।

UGC के नियमों को बताया ‘काला कानून’

यूजीसी (UGC) के हालिया दिशा-निर्देशों और नियमों पर कड़ा प्रहार करते हुए पीठाधीश्वर ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • यह कानून सामान्य वर्ग के बच्चों को जन्मजात अपराधी घोषित करने जैसा है।

  • उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कानून पूरी तरह लागू हो गया, तो यह देश को ‘गृह युद्ध’ की आग में झोंक देगा।

  • उन्होंने इस व्यवस्था का हर संभव स्तर पर विरोध करने का आह्वान किया।

इजराइल-ईरान संघर्ष और ‘जिहाद’ पर टिप्पणी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव (विशेषकर ईरान और इजराइल के बीच) पर बोलते हुए यति नरसिंहानंद ने इजराइल का खुला समर्थन किया। उन्होंने कहा:

“ईरान जैसे देशों से इजराइल जैसा छोटा राष्ट्र अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जो युद्ध इजराइल वहां हथियारों से लड़ रहा है, वही लड़ाई हम भारत में ‘विचारों’ के माध्यम से लड़ रहे हैं।”

उन्होंने ईरान को एक ‘जिहादी देश’ बताते हुए इजराइल के संघर्ष को अस्तित्व रक्षा की मिसाल बताया।

इस आयोजन के बाद ग्वालियर में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। प्रशासन की नजर कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग और दिए गए भाषणों पर है, ताकि किसी भी प्रकार की शांति व्यवस्था भंग न हो।

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