मालेगांव ब्लास्ट केस : नई दिल्ली। मालेगांव बम धमाका केस को लेकर एक बार फिर देश की सियासत गरमा गई है। इस बार खुलासा किया है उस अफसर ने, जो खुद इस मामले की शुरुआती जांच टीम का हिस्सा था। महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने दावा किया है कि इस केस में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर ‘भगवा आतंकवाद’ साबित करने की कोशिश की गई थी। इतना ही नहीं, उन पर सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने का दबाव था।
Read More : Jabalpur Crime News : स्कूल में घुसकर छात्र पर चाकू से हमला….वीडियो वायरल
“भगवा आतंक एक झूठ थी” – महबूब मुजावर
महबूब मुजावर ने कहा कि 2008 में मालेगांव बम धमाके के तुरंत बाद जब इस केस की जांच शुरू हुई, तब उन्हें जानबूझकर जांच टीम में शामिल किया गया। उनका कहना है,
“मुझे केस में शामिल करने का मकसद यह था कि भगवा आतंकवाद को स्थापित किया जा सके। मुझे स्पष्ट निर्देश मिले थे कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को इस केस में फंसाना है। ये आदेश तत्कालीन प्रमुख जांच अधिकारी परमबीर सिंह और उनके ऊपर के अधिकारियों द्वारा दिए गए थे।”
मुजावर ने कहा कि उन्होंने इस ‘फर्जी प्लान’ का विरोध किया, लेकिन परिणामस्वरूप उन पर ही कई झूठे केस दर्ज कर दिए गए। हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
इस केस में 31 जुलाई 2025 को NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया।
साध्वी प्रज्ञा के अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, सुनील जोशी, सुधाकर द्विवेदी, अजय राहिरकर, रामचंद्र कालसांगरा, और संदीप डांगे पर केस दर्ज था।
अदालत ने पाया कि सबूत या तो गढ़े गए थे या उनकी पुष्टि नहीं हो सकी।
अदालत ने इस फैसले के साथ-साथ ATS अधिकारी शेखर बागड़े के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर एक आरोपी के घर RDX रखवाया और झूठे सबूत बनाए।
जिंदा लोगों को चार्जशीट में मृत घोषित
महबूब मुजावर का एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि चार्जशीट में जिन दो लोगों (रामजी कलसंगरा और संदीप डांगे) को जिंदा दिखाया गया था, उनकी वास्तव में मौत हो चुकी थी।
“मुझे आदेश दिया गया कि इनकी लोकेशन ट्रैक करूं, जबकि मुझे पक्की जानकारी थी कि वे मर चुके हैं।”
Read More : Jabalpur News : नाबालिगों का आतंक : बाप-बेटे को सड़क पर बेल्ट और पत्थरों से पीटा, CCTV फुटेज वायरल….
सुशील कुमार शिंदे पर भी निशाना
महबूब मुजावर ने पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे का नाम लेते हुए कहा कि
“अब शिंदे जी को सामने आकर बताना चाहिए कि क्या ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसी कोई थ्योरी सच में थी, या वह सिर्फ एक राजनीतिक नैरेटिव था।”
“निर्दोषों की रिहाई से सच्चाई सामने आई”
साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों के बरी होने पर महबूब मुजावर ने प्रतिक्रिया दी –
“मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि सभी निर्दोष रिहा हो गए। मैंने जो सच बोला, उसका छोटा सा योगदान इस फैसले में है।”
फैसले से क्या स्पष्ट हुआ?
- अदालत ने एटीएस द्वारा किए गए झूठे कार्यों को खारिज कर दिया
- RDX रखने, गवाहों को गढ़ने, और नेताओं को फंसाने की साजिश बेनकाब हुई
- भगवा आतंकवाद की संकल्पना अदालत में खारिज हुई
- निर्दोषों की लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार खत्म हुई
Read More : फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ रह रही बांग्लादेशी मॉडल शांता पॉल गिरफ्तार
पृष्ठभूमि
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में एक बाइक में हुए विस्फोट में 6 लोग मारे गए थे और 101 घायल हो गए थे। शुरुआत में एटीएस ने जांच की, फिर 2011 में केस NIA को सौंपा गया। सालों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब अदालत ने इस मामले को फर्जी करार देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।











