Thursday, September 24, 2026
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Fake transfer of ownership : राजस्व तंत्र में भू-माफियाओं का खेल : फर्जी नामांतरण, स्टांप चोरी और नियमों की अवहेलना का आरोप, संयुक्त कलेक्टर से शिकायत

Fake transfer of ownership : गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा/घरघोड़ा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले के लैलूंगा क्षेत्र में आदिवासियों की बहुमूल्य भूमि हड़पने का एक संगठित मामला सामने आया है, जिसने पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मचा दिया है। नगर पंचायत क्षेत्र की करोड़ों रुपये की जमीन का फर्जी नामांतरण कर उसे नाममात्र की कीमत पर बेचने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं ने तहसीलदार शिवम पांडे सहित कुछ राजस्व कर्मचारियों पर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए संयुक्त कलेक्टर रायगढ़, प्रियंका वर्मा से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Fake transfer of ownership :
फर्जीवाड़ा कर ₹1.68 करोड़ की जमीन हड़पी

मामला नगर पंचायत लैलूंगा के खसरा नंबर 622/12 और 502/6 से जुड़ा है। यह भूमि पूर्व में स्वर्गीय जहर साय के नाम पर दर्ज थी, जिनके 14 निकट संबंधी वारिस मौजूद हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार ने उत्तराधिकार की जांच किए बिना और किसी भी वारिस या ग्राम पंचायत से सत्यापन कराए बिना, छत्तर साय के नाम पर चालाकी से भूमि का नामांतरण कर दिया। इस प्रशासनिक मनमानी का नतीजा यह हुआ कि नामांतरण होते ही यह बहुमूल्य भूमि खरसिया निवासी एक सेठ वर्ग द्वारा अपने ड्राइवर गोविंद राम सिदार के नाम पर महज ₹3.60 लाख में रजिस्ट्री करा ली गई।

Fake transfer of ownership
राजस्व नियमों का खुला उल्लंघन

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस भूमि की वास्तविक कीमत नगर निकाय गाइडलाइन के अनुसार ₹1.68 करोड़ से अधिक आंकी गई है। करोड़ों की जमीन को नाममात्र की कीमत पर बेचने के लिए स्टांप चोरी की गई; भूमि को कृषि भूमि दिखाकर दरें घटाई गईं और केवल ₹24,000 का स्टांप शुल्क लगाया गया, जबकि वास्तविक शुल्क लाखों में होना चाहिए था। शिकायतकर्ताओं (रघुनाथ सिंह और सहदेव सिंह सिदार) ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया ‘पहले से तय साजिश’ के तहत हुई, जिसमें तहसीलदार ने राजस्व संहिता की धारा 109 और उत्तराधिकार अधिनियम की स्पष्ट अवहेलना की।

Fake transfer of ownership
मोहरा या खरीदार? ड्राइवर की आर्थिक जांच की मांग

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल भूमि खरीदने वाले व्यक्ति गोविंद राम सिदार पर खड़ा हुआ है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि सिदार, जो खरसिया के एक व्यापारी का ड्राइवर है, आर्थिक रूप से ₹1.68 करोड़ की भूमि खरीदने में सक्षम नहीं है। इससे यह आशंका गहराती है कि वह केवल एक ‘मोहरा’ बनाकर किसी बड़े भू-माफिया या व्यापारी के इशारे पर काम कर रहा है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि गोविंद राम सिदार की आर्थिक स्थिति, आय स्रोत और संपत्ति का ब्यौरा जांचा जाए।

Fake transfer of ownership
प्रशासन पर अग्निपरीक्षा, एसडीएम ने दिया जांच का आश्वासन

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय जनता और आदिवासी समाज में रोष और चिंता है, उन्हें डर है कि अगर इस रैकेट पर लगाम नहीं लगी तो उनकी पैतृक भूमि समाप्त हो जाएगी। यह मामला अब जिला प्रशासन, विशेषकर कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर के लिए एक कठिन परीक्षा बन गया है। इस संबंध में एसडीएम लैलूंगा, भरत कौशिक ने कहा है कि शिकायत प्राप्त हो गई है और संपूर्ण दस्तावेज़ों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि “यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई से कोई परहेज़ नहीं किया जाएगा।”

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