Sunday, September 27, 2026
Home Chhattisgarh C.G News : EMRS भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अतिथि शिक्षकों...

C.G News : EMRS भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अतिथि शिक्षकों के अनुभव को मिलेगा वेटेज

CG NEWS
CG NEWS

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) की शिक्षण और गैर-शिक्षण भर्ती प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की पूर्व सेवाओं को चयन प्रक्रिया में उचित महत्व दिया जाए और उनके अनुभव के आधार पर समुचित वेटेज अंक प्रदान किए जाएं।

2016 से 2024 तक सेवा देने वाले शिक्षकों की याचिका

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता वर्ष 2016 से 2024 के बीच छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित EMRS विद्यालयों में PGT और TGT के रूप में कार्य कर चुके हैं। सभी संबंधित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद ने निर्णय सुनाया।

Read More : C.G शराब घोटाला केस: सौम्या चौरसिया की जमानत पर हाईकोर्ट सख्त, ED को 20 फरवरी तक जवाब का आदेश

दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सेवा का न्यायालय ने लिया संज्ञान

न्यायालय ने माना कि कई याचिकाकर्ताओं ने छह वर्ष से अधिक समय तक दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में समर्पण के साथ शिक्षण कार्य किया और विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्थायी या अतिथि सेवा से स्वतः नियमितीकरण का अधिकार उत्पन्न नहीं होता, फिर भी न्याय और समानता के सिद्धांतों के तहत उनकी दीर्घकालीन सेवा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

भर्ती प्रक्रिया में अनुभव आधारित वेटेज देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने NESTS और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ताओं की पूर्व सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें अनुभव आधारित अंक/वेटेज दिया जाए और पात्रता पूरी करने पर उनकी नियुक्ति पर विचार किया जाए।
अदालत ने जोर देकर कहा कि वर्षों तक की गई सेवा को व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता और उसका प्रभावी मूल्यांकन होना आवश्यक है।

नियमित नियुक्ति नहीं, बल्कि निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करना उद्देश्य

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सीधी नियुक्ति या नियमितीकरण का निर्देश नहीं है। इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी हो तथा पूर्व में सेवा दे चुके शिक्षकों को उनके अनुभव का वास्तविक लाभ मिल सके।

यह फैसला आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here