Thursday, September 10, 2026
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Political Funding : इलेक्टोरल बॉन्ड बैन के बाद BJP को ₹3,811 करोड़ चंदा, कांग्रेस पीछे सिर्फ ₹299 करोड़

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प्रूडेंट ट्रस्ट से BJP को सबसे ज्यादा पैसा

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राजनीतिक फंडिंग का पूरा गणित बदल गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल ट्रस्ट्स के जरिए कुल ₹3,811 करोड़ का चंदा मिला है। इसमें से ₹3,112 करोड़ अकेले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिले, जो कुल फंड का करीब 82% है।

यह खुलासा इलेक्टोरल ट्रस्ट्स द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट्स से हुआ है, जो आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बाकी सभी राजनीतिक दलों को मिलाकर सिर्फ करीब ₹400 करोड़ (10%) ही मिले। कांग्रेस को ₹299 करोड़ का चंदा मिला, जो कुल फंड का 8% से भी कम है।

क्या होते हैं इलेक्टोरल ट्रस्ट?

इलेक्टोरल ट्रस्ट एक रजिस्टर्ड संस्था होती है, जो कॉर्पोरेट कंपनियों और व्यक्तियों से चंदा लेकर राजनीतिक दलों तक पहुंचाती है। ट्रस्ट को दानदाताओं और राजनीतिक दलों की पूरी जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है, जिससे फंडिंग में पारदर्शिता बनी रहे।

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तीन गुना बढ़ा चंदा, 9 ट्रस्ट सक्रिय

20 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, 19 में से 13 इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है। इनमें से 9 ट्रस्ट्स ने 2024-25 में ₹3,811 करोड़ का दान दिया, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के ₹1,218 करोड़ के मुकाबले 200% से ज्यादा और करीब तीन गुना है।

प्रूडेंट और प्रोग्रेसिव ट्रस्ट BJP के सबसे बड़े दाता

भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिला।

  • BJP को कुल ₹3,112 करोड़ में से ₹2,180.07 करोड़ प्रूडेंट ट्रस्ट से मिले।

  • कांग्रेस को इसी ट्रस्ट से सिर्फ ₹21.63 करोड़ मिले।

दूसरे नंबर पर प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट रहा, जिसने कुल ₹914.97 करोड़ का दान किया। इसमें से ₹757.62 करोड़ BJP और ₹77.34 करोड़ कांग्रेस को दिए गए।

इलेक्टोरल बॉन्ड बंद, ट्रस्ट बने मुख्य जरिया

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में पारदर्शिता की कमी के चलते रद्द कर दिया था। इसके बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट राजनीतिक फंडिंग का मुख्य माध्यम बनकर उभरे हैं।
इलेक्टोरल ट्रस्ट स्कीम 2013 से लागू है और इन्हें कंपनी एक्ट, आयकर कानून और चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के तहत नियंत्रित किया जाता है।

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