Saturday, August 29, 2026
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M.P News : धार भोजशाला मामले में ASI रिपोर्ट में बड़ा दावा- ‘मंदिर के हिस्सों का इस्तेमाल कर बनाई गई मस्जिद…’ 16 मार्च को अगली

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  धार भोजशाला मामले में इंदौर स्थित मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ में आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लेते हुए सभी पक्षकारों को सौंप दिया।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है।

ASI सर्वे रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

मंदिर का प्रमुख ढांचा

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान संरचना एक पूर्ववर्ती मंदिर के अवशेषों पर निर्मित है। यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी का बताया गया है, जिसे परमार काल और राजा भोज के समय से जोड़ा गया है।

 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां

सर्वे के दौरान परिसर से 97 प्रमुख कलाकृतियां और मूर्तियां मिलीं, जिन्हें हिंदू धर्म से संबंधित बताया गया है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, शिव, हनुमान और श्रीकृष्ण की खंडित मूर्तियां शामिल हैं।

संस्कृत और प्राकृत शिलालेख

दीवारों और स्तंभों पर संस्कृत एवं प्राकृत भाषा में कई शिलालेख मिले हैं। इनमें राजा भोज कालीन काव्य रचनाएं और व्याकरण संबंधी सूत्रों का उल्लेख है।

इस्लामी संरचना और पुनः उपयोग

रिपोर्ट में उल्लेख है कि मस्जिद निर्माण में मंदिर के स्तंभों और पत्थरों का उपयोग किया गया। कुछ स्तंभों पर प्रतीकों को मिटाने के प्रयास के संकेत भी दर्ज किए गए हैं।

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GPR तकनीक से जांच

ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक से जमीन के नीचे दबे ढांचों, दीवारों और कमरों के संकेत मिले हैं, जिन्हें मंदिर के मूल आधार का हिस्सा बताया गया है।

वास्तुकला और शैली

स्तंभों पर घंटियां, कमल और कीर्तिमुख जैसी नक्काशी मंदिर वास्तुकला की शैली को दर्शाती हैं, जो परमार काल की पुष्टि करती हैं।

मराठा काल के संकेत

कुछ संरचनाओं पर मराठा काल का प्रभाव भी देखने को मिला है, जिससे स्थल के विभिन्न कालखंडों में उपयोग के संकेत मिलते हैं।

शिक्षा केंद्र का उल्लेख

पुरातात्विक विश्लेषण और कार्बन डेटिंग के आधार पर रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि राजा भोज (1000-1055 ई.) के समय यह स्थल एक भव्य मंदिर और प्रमुख शिक्षा केंद्र था।

आगे क्या?

रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें कोर्ट में पेश करेंगे। अदालत में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी, जहां रिपोर्ट पर आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा।Dhar Bhojshala ASI Survey Report अब इस बहुचर्चित मामले में कानूनी बहस का प्रमुख आधार बनेगी।

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