Delhi-NCR : दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में भेजने की कार्रवाई तेज हो गई है। वहीं, इस फैसले के साथ ही पालतू जानवरों खासकर कुत्तों के व्यापार और ब्रीडिंग उद्योग पर भी ध्यान केंद्रित हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया भर में पेट ब्रीडिंग का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है और यह तेजी से बढ़ रहा है।
Delhi-NCR : डॉग ब्रीडिंग उद्योग का विस्तार
मेटाटेक इनसाइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में पालतू जानवरों की ब्रीडिंग का ग्लोबल मार्केट लगभग 11.2 बिलियन डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) था। इसे 2035 तक 27.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 8.4% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है। इस मार्केट में कुत्तों की ब्रीडिंग की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जबकि बिल्ली और अन्य पालतू जानवरों का हिस्सा कम है।
चुनौतियां और नैतिकता
हालांकि, इस तेजी से बढ़ते उद्योग में अनैतिक ब्रीडिंग की प्रैक्टिस और अवैध पेट शॉप्स की समस्या भी बढ़ रही है। कुछ ब्रीडर खास नस्लों की मांग के चक्कर में जानवरों की सेहत का ध्यान नहीं रखते, जिससे उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी कारण डॉग ब्रीडिंग इंडस्ट्री में सख्त नियम और नैतिक गाइडलाइंस लागू करने की मांग बढ़ रही है।
Delhi-NCR
टेक्नोलॉजी का बढ़ता रोल
आधुनिक तकनीक की मदद से ब्रीडर्स और खरीदारों को जोड़ने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म ब्रीडिंग प्रोग्राम्स के प्रबंधन और ट्रैकिंग को आसान बनाते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया और ट्रेंड्स के कारण कुछ खास नस्लों की मांग बढ़ती रहती है, जो मार्केट की ग्रोथ में सहायक होती है।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ब्रीडिंग उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और कुत्तों की सेहत पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। नैतिक ब्रीडिंग को बढ़ावा देने के लिए कड़े नियम लागू होंगे, जिससे अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी। टेक्नोलॉजी की मदद से ब्रीडिंग को बेहतर तरीके से मैनेज किया जाएगा और ग्राहकों को स्वस्थ पालतू जानवर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस तरह, आवारा कुत्तों के प्रति जागरूकता के साथ-साथ पालतू जानवरों के कारोबार में भी नई दिशा देखने को मिल रही है, जो आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी।













