इंदौर : इंदौर के चर्चित ‘डांसिंग कॉप’ रंजीत सिंह को लेकर पुलिस विभाग ने अहम फैसला लिया है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद इंदौर पुलिस ने उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के प्रभार से हटाते हुए उनके मूल पद आरक्षक पर वापस पदस्थ कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस अनुशासन और विभाग की छवि को ध्यान में रखते हुए की गई है।
क्यों की गई विभागीय कार्रवाई
रंजीत सिंह वर्तमान में रक्षित केंद्र, इंदौर में पदस्थ थे और उन्हें प्रधान आरक्षक का कार्यवाहक प्रभार सौंपा गया था। कुछ समय पहले एक महिला द्वारा उन पर सोशल मीडिया चैटिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामला सामने आते ही पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए।
जांच में क्या सामने आया
विभागीय जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए और डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन पड़ताल की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि महिला द्वारा लगाए गए चैटिंग से जुड़े आरोप तथ्यों के आधार पर सही नहीं पाए गए। बावजूद इसके, पुलिस अधिकारियों का मानना रहा कि पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक चर्चा में आने से पुलिस बल की छवि प्रभावित हुई।
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अनुशासन को प्राथमिकता
इसी आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि रंजीत सिंह से प्रधान आरक्षक का कार्यवाहक प्रभार वापस लिया जाए। आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यह फैसला पुलिस की गरिमा, अनुशासन और मर्यादित आचरण बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
पुलिस विभाग का स्पष्ट संदेश
इंदौर पुलिस का कहना है कि भले ही आरोप झूठे साबित हुए हों, लेकिन एक पुलिसकर्मी से अपेक्षा की जाती है कि उसका आचरण हर परिस्थिति में विवादों से दूर और अनुशासित रहे। किसी भी प्रकार का विवाद पुलिस बल की साख पर असर डाल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
महकमे में चर्चा का विषय
इस कार्रवाई के बाद इंदौर पुलिस महकमे में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल रंजीत सिंह अपने मूल पद आरक्षक के रूप में रक्षित केंद्र, इंदौर में सेवाएं देंगे। पुलिस विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह के मामलों में और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।











