cricket news : नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में रविवार को आयोजित हजारों लोगों की आव्रजन विरोधी रैलियों में भारतीय प्रवासियों को भी मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। इन रैलियों का विरोध करते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसे नफरत फैलाने वाला और नियो-नाजी संगठनों से जुड़ा बताया है। ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ नामक इस आंदोलन के प्रचार सामग्री में भारतीय मूल के निवासियों को प्रमुखता से दिखाया गया, जो वहां की कुल जनसंख्या का लगभग तीन प्रतिशत हैं।
cricket news : प्रचार सामग्री में कहा गया कि पिछले पांच सालों में भारत से आए प्रवासियों की संख्या इतनी अधिक है जितनी 100 सालों में ग्रीक और इटालियन प्रवासियों की नहीं रही। यह दर्शाया गया कि इस बड़े प्रवासन ने सांस्कृतिक बदलाव लाया है और ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक संपत्ति का शोषण किया जा रहा है।
cricket news : सिडनी, मेलबर्न, कैनबरा समेत कई शहरों में बड़ी रैलियां आयोजित की गईं। सिडनी में 5,000 से 8,000 लोग राष्ट्रीय झंडों के साथ एकत्रित हुए। वहीं, इन रैलियों के विरोध में भी रिफ्यूजी एक्शन कोएलिशन ने जवाबी रैली आयोजित की। पुलिस ने सुरक्षा कड़ी करते हुए कई अधिकारियों को तैनात किया और रैलियां बिना बड़ी अप्रिय घटना के खत्म हुईं।
cricket news : मेलबर्न में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें मिर्च स्प्रे और लाठियों का इस्तेमाल किया गया। छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और दो पुलिस अधिकारी घायल हुए। कुल मिलाकर मेलबर्न में करीब 5,000 लोग शामिल थे।
cricket news : प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक सेवाओं की कमी और आर्थिक तंगी को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई। कई लोगों ने कहा कि बढ़ती आबादी के कारण उनकी जीवनशैली और संसाधनों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
cricket news : राजनीतिक दलों ने इन रैलियों की कड़ी निंदा की है। संघीय श्रम मंत्री मरे वाट ने इसे नफरत फैलाने वाला बताया और कहा कि ऐसी रैलियां समाज को विभाजित करती हैं। गृह मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि ऐसे लोग जो सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके लिए देश में कोई जगह नहीं है। विपक्षी नेता सुज़ैन ले ने भी नफरत और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई।
cricket news : अटॉर्नी जनरल जूलियन लीसर ने इन रैलियों में भारत-विरोधी और यहूदी-विरोधी भावनाओं पर चिंता जताई। ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में दक्षिणपंथी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। अक्टूबर 2023 में इजरायल-गाजा युद्ध के बाद यहूदी विरोधी हमलों के मद्देनजर नए कानून भी लागू किए गए हैं, जिनमें चरमपंथी प्रतीकों के प्रदर्शन और बिक्री पर प्रतिबंध शामिल है। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में विविधता और सहिष्णुता के मुद्दे पर एक गंभीर चर्चा को जन्म दे रहा है।











