Surajpur Congress Protest: सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले सूरजपुर जिले के विश्रामपुर औद्योगिक अंचल में इस वक्त तीव्र राजनैतिक घमासान और प्रशासनिक तनाव व्याप्त हो गया है। शिवनंदनपुर क्षेत्र के कद्दावर नेता और कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज की गई नामजद प्राथमिकी (FIR) के विरोध में समूची प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) विश्रामपुर थाने के सामने विधिक मोर्चे पर डट गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस के तमाम शीर्ष नीति-निर्धारक, पूर्व मंत्री और हजारों जांबाज कार्यकर्ता पिछले 24 घंटों से अधिक समय से थाने के मुख्य द्वार के सामने कड़ा कस्टमाइज्ड धरना दे रहे हैं। कांग्रेस ने दो टूक विधिक शब्दों में आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के कड़े राजनैतिक दबाव में आकर विश्रामपुर पुलिस ने यह पूरी तरह निराधार, एकतरफा और राजनीति से प्रेरित विधिक कार्रवाई संस्थित की है।
आर्म्स एक्ट हटाने और थानेदार पर विधिक कार्रवाई की मांग पर अड़ी कांग्रेस
धरना स्थल पर कस्टमाइज्ड रूप से बैठे पीसीसी चीफ दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (SP) के समक्ष मुख्य विधिक मांगों का कस्टमाइज्ड एजेंडा प्रस्तुत किया है:
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आर्म्स एक्ट हटाने की विधिक मांग: कांग्रेस नेताओं का मुख्य विधिक प्रतिवाद यह है कि जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ दर्ज मामले में दुर्भावनापूर्वक ‘आर्म्स एक्ट’ की संगीन और गैर-जमानती धाराएं जोड़ी गई हैं, जिन्हें तत्काल विधिक रूप से विलोपित (हटाया) किया जाए।
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क्रॉस एफआईआर और निलंबन: आंदोलनकारियों की मांग है कि नरेंद्र जैन पर दर्ज झूठी एफआईआर को पूरी तरह वापस लेकर शिकायतकर्ता भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कड़ा विधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही, सत्तापक्ष के इशारे पर एकतरफा विधिक विवेचना करने वाले संबंधित थाना प्रभारी (थानेदार) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दंडात्मक विभागीय जांच संस्थित की जाए।
आपसी खींचतान की खबरों पर विराम; टी.एस. सिंहदेव की कार में सवार होकर पहुंचे भूपेश बघेल
विश्रामपुर के इस हाई-प्रोफाइल राजनैतिक आंदोलन के बीच मंगलवार (26 मई 2026) को धरना स्थल पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल भी कस्टमाइज्ड रूप से शामिल हुए।
राजनैतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र: भूपेश बघेल के आगमन के दौरान सरगुजा और छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे अनूठा और कस्टमाइज्ड नजारा देखने को मिला, जिसने विपक्षी दलों के खेमे में विधिक हलचल तेज कर दी। पिछले लंबे समय से कथित वैचारिक मतभेदों और आपसी खींचतान की खबरों के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सुप्रसिद्ध ‘जय-वीरू’ की जोड़ी एक बार फिर पूरी तरह विधिक एकजुटता के साथ मैदान में नजर आई। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने स्वयं ड्राइविंग सीट संभाली और कार चलाकर धरना स्थल पहुंचे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बगल की सीट पर कस्टमाइज्ड रूप से सवार थे। पीसीसी चीफ दीपक बैज की मौजूदगी में इन दोनों दिग्गजों का एक ही जाजम (मंच) पर बैठना प्रदेश की सत्ता संभाल रही सरकार के लिए एक बड़ा और कड़ा विधिक संदेश माना जा रहा है।
शाम तक का कड़ा अल्टीमेटम; विश्रामपुर थाना बना छावनी
24 घंटे से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी जिला प्रशासन द्वारा मांगों पर कोई सकारात्मक विधिक निर्णय न लिए जाने से कांग्रेस आलाकमान का रुख और अधिक आक्रामक हो गया है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन को आज शाम तक का अंतिम विधिक अल्टीमेटम (Dead Line) जारी किया है। कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर नरेंद्र जैन को विधिक राहत प्रदान करते हुए दोषी अधिकारियों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो कलेक्ट्रेट और थाने के सामने कांग्रेस के दिग्गज पदाधिकारी व कार्यकर्ता सामूहिक रूप से ‘आमरण अनशन’ (Fast Unto Death) तथा क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करने को विधिक रूप से मजबूर होंगे।
मामले की अत्यधिक विधिक संवेदनशीलता और वीआईपी (VIP) जमावड़े को देखते हुए विश्रामपुर थाने के चारों ओर भारी संख्या में सशस्त्र पुलिस बल, वज्र वाहन और दंगा नियंत्रण दस्ते को तैनात कर पूरे अंचल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वर्तमान में कस्टमाइज्ड गतिरोध और तनाव की विधिक स्थिति बरकरार है।









