कोयले की चोरी : मेघालय : मेघालय के दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले में स्थित राजाजू और डिएंगनागांव के कोल डिपो से करीब 4,000 टन कोयला रहस्यमय ढंग से गायब हो गया है। इस सनसनीखेज प्रकरण ने राज्य सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है।
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मामले ने तब और तूल पकड़ा जब राज्य के आबकारी मंत्री किरमेन शायला ने मीडिया से बातचीत में एक विवादास्पद बयान देते हुए दावा किया कि भारी बारिश के चलते यह कोयला पड़ोसी राज्य असम और बांग्लादेश तक बहकर चला गया होगा। मंत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
“बारिश में बह गया कोयला”
मंत्री किरमेन शायला ने कहा—
“मैं केवल बारिश को दोष नहीं दे सकता, लेकिन मेघालय में सबसे अधिक बारिश होती है। हो सकता है भारी बारिश के चलते कोयला बह गया हो। हालांकि, मेरे पास इसकी पुष्टि करने वाला कोई ठोस दस्तावेज नहीं है।”
मंत्री ने इस बात से इनकार नहीं किया कि अवैध खनन या कोयले के अवैध परिवहन की संभावना भी हो सकती है। लेकिन वह इसके लिए किसी अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से बचते नजर आए।
हाईकोर्ट ने सुनाई सख्त फटकार
मेघालय हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को 25 जुलाई को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति हमरसन सिंह थांगख्यू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोयले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि जो अधिकारी इस कोयले की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे, उनकी पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
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उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2014 में मेघालय में ‘रैट-होल’ कोल माइनिंग और अनियंत्रित खनन गतिविधियों पर रोक लगाई थी। यह प्रतिबंध पर्यावरणीय क्षरण, जल प्रदूषण और खतरनाक खनन तकनीकों के कारण लगाया गया था।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने सरकार की इस सफाई को “मजाक” करार दिया और कहा कि सरकार अवैध खनन माफिया को बचाने के लिए मॉनसून को जिम्मेदार ठहरा रही है। इस पूरे मामले को लेकर संसद में भी विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तंज कसते हुए जवाबदेही की मांग की है।













