CM Mohan Yadav Raisen Visit : रायसेन (23 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को रायसेन जिले के प्रसिद्ध हलाली डैम क्षेत्र में एक विशेष वन्यजीव पुनर्वास कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से दुर्लभ प्रजाति के 5 गिद्धों को खुले आसमान में मुक्त किया। प्रदेश सरकार द्वारा गिद्धों के संरक्षण और उनकी घटती संख्या को रोकने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों के तहत यह एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘सफाईकर्मी’ की भूमिका वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध प्राकृतिक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र के ‘सफाईकर्मी’ कहलाते हैं। वे मृत पशुओं के अवशेषों को खाकर जंगलों और ग्रामीण इलाकों में संक्रमण फैलने से रोकते हैं। पिछले कुछ दशकों में दवाओं (विशेषकर डिक्लोफेनाक) और अन्य कारणों से गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार अब उनके संरक्षण और कृत्रिम प्रजनन के बाद पुनर्वास पर जोर दे रही है।
जैव विविधता पर मुख्यमंत्री का जोर इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जैव विविधता की रक्षा करना केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और हलाली डैम जैसे क्षेत्रों को इन दुर्लभ पक्षियों के अनुकूल विकसित किया जा रहा है।
संरक्षण और पुनर्वास कार्यक्रम मध्य प्रदेश गिद्ध गणना और संरक्षण में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में ‘वल्चर रेस्टोरेंट्स’ और प्रजनन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। आज की कार्रवाई इसी संरक्षण नीति का हिस्सा है, ताकि जंगलों में गिद्धों की संख्या को फिर से पुरानी स्थिति में लाया जा सके।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
“वन्यजीव और जैव विविधता हमारी अमूल्य धरोहर हैं। गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं, क्योंकि वे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। हमारी सरकार इनके पुनर्वास और संरक्षण के लिए हर संभव कदम उठा रही है ताकि आने वाली पीढ़ी को एक संतुलित पर्यावरण मिल सके।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश











