रायपुर [Nishanebaaz News]CM Vishnu Deo Sai Hareli Tihar Celebration। छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक तिहार ‘हरेली’ की पूरे प्रदेश में धूम धाम से शुरुआत हो चुकी है। राजधानी रायपुर से लेकर दूर-दराज़ के गांव-गांव तक हरेली पर्व को अपार उत्साह, उमंग और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में एक भव्य एवं भव्यतम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक देखने को मिली।
जय छत्तीसगढ़ महतारी…
सीएम ह करिस पूजा, मांगिस आसीस,
हरेली तिहार म बगरिस सुख-समृद्धि के सुवास।
सुशासन म हरियर होत हे खेत-खार, खुशहाल होत हे जम्मो परिवार,
हरेली के पावन तिहार म गूंजय छत्तीसगढ़ महतारी के जयकार।।📍मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर #HareliTihar #Hareli2026… pic.twitter.com/3U0LpGcjZT
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) August 12, 2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस विशेष आयोजन में ठेठ छत्तीसगढ़ी पारंपरिक परिधान धारण कर शामिल हुए। उनके आगमन से कार्यक्रम का उत्साह दोगुना हो गया। मुख्यमंत्री निवास को हरेली तिहार की थीम पर नीम-आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और ग्रामीण परिवेश के सजावटी सामानों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर किसी पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गांव जैसा नजर आ रहा था।
गेड़ी के रच-रच,
मोहरी के मीठ धुन,
हरेली के सुघ्घर तिहार म,
पैरी बाजे रुनझुन।माटी के महक,
मन म उमंग अपार,
हरेली तिहार लाए,
खुशहाली के बहार।📍मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर #HareliTihar #Hareli2026 #Chhattisgarh #Chhattisgarhi #ChhattisgarhCulture #Sushasansarkar… pic.twitter.com/h7PivIBpKG
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) August 12, 2026
पारंपरिक खेल, व्यंजन और लोककला का संगम
आयोजन में राज्य की समृद्ध खेल और खान-पान परंपरा का अद्भुत संगम दिखा:
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पारंपरिक खेल और गेड़ी: कार्यक्रम में गेड़ी दौड़ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक ग्रामीण खेलों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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छत्तीसगढ़ी व्यंजन: अतिथियों व आमजनों के लिए ठेठरी, खुरमी, बड़ा और चीला जैसे पारंपरिक पकवानों की खास व्यवस्था की गई, जिसने लोगों को ग्रामीण स्वाद का अहसास कराया।
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लोक संगीत और रहचुली: मांदर और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर लोक कलाकारों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। परिसर में लगी रहचुली (पारंपरिक झूला) का आनंद बच्चों और बड़ों सभी ने उठाया।
कृषि और प्रकृति से गहराई से जुड़े इस पर्व पर किसान अपने कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस उत्सव ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ अपनी आधुनिक विकास यात्रा के साथ-साथ अपनी लोक अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और मिट्टी की महक को भी पूरी निष्ठा से सहेज रहा है।

